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पाठ-400: दोष: बर्न-थ्रू और अति-पैठ
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पाठ परिचय
पाठ-394 में आपने अधूरी पैठ (बहुत कम) सीखी थी — आज उसके बिल्कुल उल्टे, बहुत ज़्यादा पैठ से जुड़े दो दोष, बर्न-थ्रू और अति-पैठ। यह पाठ-295 की एल्युमिनियम-बर्न-थ्रू सीख को, एक सामान्य, हर धातु पर लागू होने वाले सिद्धांत में बदलता है।
सीखने का उद्देश्य
इस पाठ के बाद आप: (1) बर्न-थ्रू के लक्षण पहचान पाएँगे, (2) अति-पैठ क्या है, यह समझ पाएँगे, (3) दोनों में क्या फ़र्क़ है, यह जान सकेंगे, (4) सुधार-रोकथाम सीख पाएँगे।
मुख्य बात — दोष-जड़-तालिका से बर्न-थ्रू और अति-पैठ
दोष: बर्न-थ्रू — धातु इतनी ज़्यादा पिघल जाती है कि जोड़ में एक छेद बन जाता है; अति-पैठ — रूट-पास, पाइप या प्लेट के भीतर की तरफ़, ज़रूरत से ज़्यादा उभर जाता है ("रूट-प्रोट्रूज़न", पाठ-353 जैसी सीख)।
लक्षण: बर्न-थ्रू में, एक साफ़, आर-पार छेद दिखता है — अति-पैठ में, भीतरी सतह पर, ज़रूरत से ज़्यादा, गोल, उभरा हुआ धातु का हिस्सा दिखता है।
कारण: दोनों का साझा कारण है — बहुत ज़्यादा गरमी (करंट बहुत ज़्यादा, गति बहुत धीमी) या बहुत बड़ा रूट-गैप, जो आर्क को ज़रूरत से कहीं ज़्यादा गहराई तक पिघलाने देता है।
पैरामीटर: करंट बहुत ज़्यादा, गति बहुत धीमी, रूट-गैप बहुत बड़ा, या धातु बहुत पतली (पाठ-198 जैसी सीख) — यह मुख्य पैरामीटर हैं।
सुधार: बर्न-थ्रू में, छेद को पहले बंद करना (कभी-कभी एक बैकिंग-स्ट्रिप की मदद से), फिर सही सेटिंग से दोबारा भरना — अति-पैठ में, अगर बहुत ज़्यादा हो तो भीतरी उभार को ग्राइंड करना (जहाँ पहुँच संभव हो)।
रोकथाम: सही करंट-गति, सही रूट-गैप (WPS के अनुसार), और पतली धातु में ख़ासकर सावधानी — यह सब बर्न-थ्रू और अति-पैठ, दोनों रोकते हैं।
बर्न-थ्रू और अति-पैठ — दोनों 'बहुत ज़्यादा गरमी/खुलापन' के परिवार से हैं, अधूरी-पैठ (394) के ठीक उलटे छोर पर बैठे दोष; और दोनों वहीं सबसे ज़्यादा मिलते हैं जहाँ पतली चादर या खुला-गैप एक-साथ आते हैं। बर्न-थ्रू — गरमी/चाप इतना कि जड़-धातु सीधे पिघलकर छेद बना देती है (धातु 'जुड़ी' नहीं, 'गायब' हो गई): पतली चादर (पाठ-288 की नाज़ुक दुनिया) पर सबसे आम, बड़ा रूट-गैप (344-345 की तैयारी-चूक) और बहुत ज़्यादा एम्पियर/धीमी चाल इसके सीधे कारण; सुधार — छेद के इलाक़े को साफ़-गोल काटकर छोटा पैच/भराई (या डिज़ाइन-अनुसार पूरी दोबारा-कटाई-फ़िट-अप); रोकथाम — पतले माल पर एम्पियर-चार्ट का निचला-सिरा, नपा-छोटा गैप, तेज़-सधी चाल। अति-पैठ (excess penetration) — जड़-पास में इतनी गरमी/खुला-गैप कि पिघली धातु दूसरी ओर 'लटककर टपकती' है (icicle-root — पाइप-जगत की भाषा में 'लटकती ज़्यादा-पैठ', 353 का ही एक दर्ज दोष अब औपचारिक-नाम पाकर): बहाव-लाइन (डेयरी-दाब जगत) में यह अड़चन-जेब बनाती है, पूरी 'ना' के दायरे में (291 की सीधी सूची); कारण — बहुत ज़्यादा एम्पियर, बहुत लंबा ठहराव कीहोल पर, या बहुत खुला रूट-गैप; रोकथाम — पैडल/एम्पियर की नपी लगाम (कीहोल-भाषा — पाठ-126/301/347 — 'नाख़ून-चाँद जितना, बड़ा नहीं'), सही रूट-फ़ेस-गैप जोड़ी। दोनों दोषों की साझा सीख: पतली-माल और खुली-जड़ पर 'ज़्यादा गरमी हमेशा ज़्यादा पक्का जोड़ है' सोचना ग़लत — यहाँ नियम उल्टा है, क्योंकि माल के पास 'फैलने' की जगह ही कम है।
चित्र से समझिए
*(चित्र-विवरण: बर्न-थ्रू में छेद बन जाता है, अति-पैठ में भीतर ज़्यादा उभार आता है — दोनों का साझा कारण ज़्यादा गरमी और बड़ा रूट-गैप है।)*
आसान भाषा में समझिए
बहुत तेज़ आँच पर पतली रोटी सेकने से, वह जल्दी जलकर छेद हो सकती है — मोटी रोटी में यह ख़तरा कम होता है। बर्न-थ्रू भी वैसा ही एक "बहुत तेज़ आँच" का नतीजा है, ख़ासकर पतली धातु में।
असली उदाहरण — करंट घटाने से रुका बर्न-थ्रू
एक प्रशिक्षु, पतली शीट पर, बहुत ज़्यादा करंट के साथ वेल्ड कर रहा था — जोड़ में एक छोटा छेद बन गया। उस्ताद ने समझाया — "पतली धातु में, करंट कम, गति थोड़ी तेज़ रखनी चाहिए, ताकि गरमी ज़्यादा जमा न हो।" सही सेटिंग से, अगला जोड़ बिना बर्न-थ्रू के, साफ़ बना।
AI के साथ अभ्यास
ACS के AI साथी से कहिए: "बर्न-थ्रू और अति-पैठ पर मेरी परीक्षा लो — (क) दोनों में क्या फ़र्क़ है, (ख) साझा कारण क्या है, (ग) पतली धातु में क्या ख़ास सावधानी चाहिए; फिर मुझसे पूछो कि यह अधूरी पैठ (पाठ-394) से कैसे उल्टा है।" AI सलाह है, फ़ैसला नहीं।
आज ही करने का काम (Step-by-Step गतिविधि)
(1) डायरी में बर्न-थ्रू और अति-पैठ को दोष-जड़-तालिका के छह हिस्सों में लिखिए। (2) पाठ-295 की एल्युमिनियम-बर्न-थ्रू सीख से इसका जुड़ाव समझाइए। (3) सोचिए कि पतली धातु में इससे बचने के लिए क्या करेंगे। (4) यह जानकारी डायरी में दर्ज कीजिए।
आज बर्न-थ्रू और अति-पैठ को नियंत्रित-तरीक़े से देखिए — साठ मिनट, सावधानी-समेत। चरण-1 (बर्न-थ्रू, 20 मिनट): पतली चादर के टुकड़े पर जान-बूझकर ऊँचा-एम्पियर + धीमी चाल — छेद बनते ही रुकिए (लक्ष्य नमूना देखना है, बड़ा नुक़सान नहीं); छेद की तस्वीर + जड़-नोट। चरण-2 (अति-पैठ, अगर पाइप/ग्रूव-सेटअप उपलब्ध हो, 20 मिनट): बड़े रूट-गैप वाले जोड़ पर लंबा ठहराव — पीठ से लटकी-टपकी जड़ देखिए (301 की चाँदी-रेखा अब बिगड़ी शक्ल में)। चरण-3 (सुधार-रस्म, 15 मिनट): बर्न-थ्रू के छेद की पैच-मरम्मत (265 की रीति) या पूरी दोबारा-कटाई। चरण-4 (391-तालिका अद्यतन, 5 मिनट): दोनों दोषों की पंक्तियाँ जोड़िए — 'अधूरी-पैठ के ठीक उलटे छोर' नोट समेत। डायरी-गाँठ: 'गरमी की दो हदें हैं — बहुत कम में जड़ अधूरी रह जाती है, बहुत ज़्यादा में वह बहकर निकल जाती है; असली हुनर दोनों हदों के बीच के संकरे रास्ते को हर बार खोज लेना है।'
आम गलतियाँ
(1) पतली धातु पर भी मोटी धातु जितना ही करंट रखना। (2) बहुत धीमी गति से वेल्ड करना, गरमी जमा होने देना। (3) रूट-गैप को ज़रूरत से बड़ा रखना। (4) बर्न-थ्रू और अति-पैठ को एक ही समस्या समझना, जबकि दोनों की जगह-गंभीरता अलग है।
सावधानियाँ
यह पाठ पढ़ने-समझने का है, कोई विशेष वेल्डिंग-सावधानी नहीं।
overhead/पाइप-नीचे की मुद्रा में बर्न-थ्रू या अति-पैठ होने पर पिघली धातु सीधे नीचे टपकती है — कभी भी जोड़ के ठीक नीचे खड़े न हों (पाठ-242 की overhead-चेतावनी यहाँ जान-जोखिम की बात है); छेद बनते ही तुरंत आर्क रोकें, ज़िद करके 'ठीक करने' की कोशिश न करें। और एक याद-पंक्ति: बर्न-थ्रू और अति-पैठ दोनों बताते हैं कि 'ज़्यादा गरमी हमेशा बेहतर' सोचना पतले-माल और खुली-जड़ पर सबसे महँगी ग़लती है — यहाँ संयम ही असली कौशल है। दुकान-रस्म के तौर पर, पतले माल और खुली-जड़ के काम पर एक 'परीक्षा-टुकड़ा' पहले बना लेना समझदारी है — असली काम शुरू करने से पहले उसी सेटिंग पर एक छोटा नमूना जाँचकर बर्न-थ्रू का ख़तरा वहीं टाला जा सकता है।
तेज़ दोहराव
बर्न-थ्रू = धातु में आर-पार छेद बनना · अति-पैठ = भीतर ज़रूरत से ज़्यादा उभार · साझा कारण = ज़्यादा गरमी, बड़ा रूट-गैप · पतली धातु में ख़तरा ज़्यादा · रोकथाम = सही करंट-गति, सही रूट-गैप।
छोटी परीक्षा (Quiz)
(1) बर्न-थ्रू क्या है? (2) अति-पैठ क्या है? (3) दोनों का साझा कारण क्या है? (4) यह अधूरी पैठ से कैसे उल्टा है? (5) पतली धातु में क्या सावधानी चाहिए?
पाठ का सार (Chapter Summary)
बर्न-थ्रू (आर-पार छेद) और अति-पैठ (भीतर ज़रूरत से ज़्यादा उभार), दोनों बहुत ज़्यादा गरमी या बड़े रूट-गैप से बनते हैं — यह अधूरी पैठ (पाठ-394) के बिल्कुल उल्टे कारणों से आते हैं। पतली धातु में यह ख़तरा ख़ासकर ज़्यादा है — सही करंट-गति, और सही रूट-गैप, दोनों दोषों को रोकते हैं।
आगे क्या सीखें
ज़्यादा-गरमी वाले दोष सीख लिए। अगला पाठ (401) दोष: अंडरफ़िल और ज़्यादा रिइनफ़ोर्समेंट — जहाँ आप कैप-परत से जुड़े दो और दोष सीखेंगे।
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वीडियो (Video)
इस पाठ का जाँचा-परखा वीडियो जल्द यहीं जुड़ेगा। तब तक दो जीवित रास्ते —
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(दोनों नई खिड़की में; वीडियो बिना भी पाठ पूरा — पढ़ाई कहीं नहीं रुकती।)
