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पाठ-32: मशीन के बटन-घुंडी — करंट घटाना-बढ़ाना
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पाठ परिचय
पाठ-21 (दो परिवार) में हमने वेल्डिंग मशीनों के दो बड़े परिवारों से दोस्ती की थी — भारी-भरकम ट्रांसफार्मर (Transformer) और हल्का-फुल्का इन्वर्टर (Inverter)। फिर पाठ-22 (नाम-पट्टी/Duty Cycle) में हमने मशीन का आधार-कार्ड यानी उसकी नाम-पट्टी पढ़ना सीखा था, ताकि हमें पता रहे कि हमारी मशीन की सीमा क्या है।
आज हम उससे एक कदम आगे बढ़ेंगे। जब आप मशीन के सामने खड़े होते हैं, तो उस पर कुछ बटन और एक गोल घूमने वाली घुंडी (Knob) दिखाई देती है। यह घुंडी ही मशीन का स्टीयरिंग व्हील है। जैसे ट्रैक्टर को खेत में जोतते समय सही गियर और रेस देनी पड़ती है, वैसे ही मज़बूत वेल्डिंग के लिए मशीन की इस घुंडी से सही बात करनी आनी चाहिए।
आज के पाठ में हम सीखेंगे कि इस घुंडी को कब, कितना और क्यों घुमाना है, और मशीन पर लगी बत्तियाँ हमें क्या इशारा करती हैं।
सीखने का उद्देश्य
इस पाठ को पूरा करने के बाद आप ये बातें अच्छी तरह समझ जाएँगे:
1. करंट (Current) यानी एम्पीयर (Ampere) की घुंडी कैसे काम करती है और इसे सही जगह सेट करना क्यों ज़रूरी है।
2. चादर और इलेक्ट्रोड की मोटाई देखकर सही करंट चुनने का मोटा नियम क्या है।
3. मशीन के अन्य बटन, पंखे और गरम-सूचक बत्ती (Overheat Indicator) का क्या मतलब है।
4. बिना किसी मीटर के, केवल कान से आवाज़ सुनकर सही करंट की पहचान कैसे की जाती है।
मुख्य बात — करंट की आँच और मशीन के इशारे
वेल्डिंग मशीन में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है करंट (Current), जिसे हम तकनीकी भाषा में एम्पीयर (Ampere) कहते हैं। इसे आप अपनी रसोई के चूल्हे की आँच की तरह समझ सकते हैं।
1. करंट का पूरा खेल: आँच कम या ज़्यादा?
अगर आप करंट की घुंडी को बहुत कम पर रखेंगे, तो वेल्डिंग की आँच ठंडी रह जाएगी। इसे हम ठंडा टाँका (Cold Weld) कहते हैं। इसमें इलेक्ट्रोड (Electrode) यानी वेल्डिंग छड़ बार-बार लोहे से चिपकेगी, पिघला हुआ लोहा बहेगा नहीं और जोड़ बहुत कमज़ोर बनेगा।
इसके विपरीत, अगर आप करंट बहुत ज़्यादा बढ़ा देंगे, तो आँच इतनी तेज़ हो जाएगी कि लोहा पिघलने के बजाय जलने लगेगा। पतली चादर होगी तो उसमें बड़ा-सा छेद (Blow through) हो जाएगा, और वेल्डिंग करते समय बहुत सारे जलते हुए छींटे (Spatter) उड़ेंगे।
2. करंट चुनने का मोटा नियम:
सही करंट का चुनाव दो चीज़ों पर निर्भर करता है — पहली, जिस लोहे की चादर को आप जोड़ रहे हैं उसकी मोटाई; और दूसरी, आपके होल्डर (Holder) में लगी वेल्डिंग छड़ की मोटाई।
पाठ-26 (छड़-नंबर व डिब्बे का दायरा) याद कीजिए। वेल्डिंग छड़ के डिब्बे पर हमेशा एक करंट का दायरा छपा होता है (जैसे 80 से 120 एम्पीयर)। वह डिब्बा ही आपका पहला गुरु है। शुरुआत हमेशा उस दायरे के बीच से करनी चाहिए।
3. मशीन के बाक़ी बटन और बत्तियाँ:
मशीन पर एक मुख्य चालू-बंद स्विच (ON/OFF Switch) होता है। इसके अलावा आज की आधुनिक मशीनों पर एक गरम-सूचक बत्ती (Overheat Indicator) होती है। पाठ-22 में हमने ड्यूटी साइकिल (Duty Cycle) पढ़ा था। जब मशीन लगातार काम करके बहुत गरम हो जाती है, तो यह पीली या लाल बत्ती जल उठती है। इसका मतलब है मशीन थक गई है। ऐसे में मशीन का बटन बंद नहीं करना है! मशीन को चालू रहने दें ताकि उसका पंखा (Fan) घूमता रहे और अंदर के पुर्जों को जल्दी ठंडा कर दे। जब बत्ती बुझ जाए, तब दोबारा वेल्डिंग शुरू करें।
4. कान से पहचानिए सही करंट:
एक अच्छा कारीगर आँखों से ज़्यादा अपने कानों का इस्तेमाल करता है।
• सही करंट: जब करंट एकदम सही होगा, तो वेल्डिंग करते समय एक जैसी, बिना रुके चरचराहट की आवाज़ आएगी। यह आवाज़ वैसी ही होती है जैसी रसोई में गरम तेल में राई या जीरे का तड़का लगाने पर आती है।
• ज़्यादा करंट: अगर करंट बहुत ज़्यादा है, तो आवाज़ भड़-भड़ करके धमाके जैसी आएगी, जैसे छोटे पटाखे फूट रहे हों।
• कम करंट: अगर करंट बहुत कम है, तो आवाज़ बहुत धीमी होगी या फिर बार-बार चिप-चिप की अटकने वाली आवाज़ आएगी।
5. नई मशीन पर पहला काम:
जब भी आप किसी नई दुकान पर जाएँ या नई मशीन हाथ में लें, तो सीधे मुख्य काम शुरू न करें। पहले लोहे का एक बेकार टुकड़ा (Scrap Metal) लें। उस पर घुंडी को घुमा-घुमाकर अलग-अलग करंट पर वेल्डिंग करें और उसकी आवाज़ को कान में बिठाएँ।
चित्र से समझिए
आसान भाषा में समझिए
इसे अपने घर की रसोई से समझिए। मान लीजिए आप तवे पर रोटी बना रहे हैं।
अगर गैस की आँच बहुत धीमी होगी, तो रोटी पकेगी नहीं। वह तवे पर पड़ी-पड़ी सूख जाएगी, कड़क हो जाएगी और खाने लायक़ नहीं बचेगी। वेल्डिंग में कम करंट का यही हाल होता है — लोहा पिघलता नहीं, बस छड़ चिपकती रहती है और ऊपर एक कमज़ोर पपड़ी जम जाती है।
और अगर आपने गैस की आँच को बिल्कुल तेज़ कर दिया, तो क्या होगा? रोटी तवे पर जाते ही जलकर काली हो जाएगी, पर अंदर से कच्ची ही रहेगी। वेल्डिंग में ज़्यादा करंट रखने पर भी यही होता है — लोहा पिघलकर बह जाता है, चादर में छेद हो जाता है और जोड़ अंदर से खोखला रह जाता है।
जैसे हर खाने की अपनी आँच होती है — चाय तेज़ आँच पर उबाली जाती है पर खीर को धीमी आँच पर पकाया जाता है — वैसे ही वेल्डिंग में हर मोटाई के लोहे के लिए करंट की अपनी निश्चित आँच होती है। पतले पाइप के लिए कम आँच (कम करंट) और भारी चैनल या गाडर के लिए तेज़ आँच (ज़्यादा करंट)।
असली उदाहरण — उस्ताद की बीस नंबर की जादूगरी
हमारी दुकान पर एक नया लड़का आया था — मदन। वह बहुत मेहनती था, लेकिन वेल्डिंग करते समय उसका हाथ बहुत काँपता था। एक दिन वह लोहे की खिड़की के फ़्रेम पर टाँका लगा रहा था। उसकी वेल्डिंग छड़ बार-बार लोहे से चिपक जाती थी। वह झुँझला गया और अपनी छड़ को ही दोष देने लगा — "उस्ताद, यह छड़ सीलन खाई हुई है, बेकार है, काम ही नहीं कर रही!"
उस्ताद मुस्कुराए। उन्होंने मदन के हाथ से होल्डर लिया और मशीन की तरफ़ देखा। मशीन पर करंट की घुंडी केवल 70 एम्पीयर पर सेट थी, जबकि मदन 3.15 मिलीमीटर (Millimeter) की मोटी छड़ इस्तेमाल कर रहा था। इतने कम करंट पर तो छड़ चिपकेगी ही!
उस्ताद ने बिना कुछ कहे घुंडी को घुमाया और करंट को बढ़ाकर 110 एम्पीयर पर कर दिया। फिर उन्होंने जैसे ही छड़ को लोहे से छुआया, मशीन से एक सुरीली, लगातार चरचराने वाली आवाज़ आने लगी। टाँका मक्खन की तरह बहने लगा और एक ही बार में मज़बूत जोड़ बन गया। मदन हैरान रह गया।
उस्ताद ने समझाया — "मदन, औज़ार को गाली देने से पहले मशीन के मिज़ाज को समझो। छड़ गीली नहीं थी, बस तुम्हारी आँच कम थी।"
AI के साथ अभ्यास
अपने मोबाइल पर AI साथी से ये सवाल पूछकर बातचीत कीजिए:
1. "मेरे पास 3 मिलीमीटर मोटी लोहे की चादर है और मैं 2.5 मिलीमीटर की 6013 नंबर वाली छड़ इस्तेमाल कर रहा हूँ। मुझे मशीन का करंट कितने पर रखना चाहिए?"
2. "अगर मैं पतले पाइप पर वेल्डिंग कर रहा हूँ और उसमें बार-बार छेद हो जा रहे हैं, तो मुझे करंट कितना कम करना चाहिए?"
3. "क्या अलग-अलग वेल्डिंग पोजीशन (जैसे खड़ी वेल्डिंग या सिर के ऊपर की वेल्डिंग) में भी करंट की घुंडी बदलनी पड़ती है?"
आज ही करने का काम (Step-by-Step गतिविधि)
आज अपनी दुकान या ट्रेनिंग सेंटर पर जाकर यह अभ्यास खुद करें:
1. पहला कदम: मशीन बंद हालत में हो, तब उसके सामने खड़े होकर उसकी करंट घुंडी को ध्यान से देखें। देखें कि उस पर नंबर कहाँ से कहाँ तक लिखे हैं (जैसे 0 से 200 या 300 तक)।
2. दूसरा कदम: वेल्डिंग छड़ का डिब्बा उठाएँ और उस पर लिखे करंट के दायरे को पढ़ें। अपनी डायरी में लिखें कि 2.5 मिमी और 3.15 मिमी की छड़ के लिए क्या दायरा लिखा है।
3. तीसरा कदम: एक बेकार लोहे का टुकड़ा लें। मशीन चालू करें और करंट को बहुत कम (मान लीजिए 50 एम्पीयर) पर सेट करें। वेल्डिंग करने की कोशिश करें और देखें कि छड़ कैसे चिपकती है।
4. चौथा कदम: अब करंट को बहुत ज़्यादा (मान लीजिए 160 एम्पीयर) पर सेट करें। एक सेकंड के लिए वेल्डिंग छुएँ और उड़ते हुए छींटों और तेज़ आवाज़ को महसूस करें।
5. पाँचवाँ कदम: अब करंट को डिब्बे पर लिखे सही दायरे के बीच में (लगभग 100 एम्पीयर) पर लाएँ। अब वेल्डिंग करें और उस सुरीली 'चर-चर' की आवाज़ को अपने दिमाग में बिठा लें।
आम गलतियाँ
चलते टाँके के बीच में घुंडी घुमाना: यह सबसे बड़ी और ख़तरनाक ग़लती है। जब वेल्डिंग चल रही हो (यानी आर्क बन रहा हो), उस समय करंट की घुंडी को कभी नहीं घुमाना चाहिए। इससे मशीन के अंदर बहुत भारी स्पार्क होता है और मशीन के महँगे पुर्जे तुरंत जल सकते हैं। हमेशा पहले होल्डर को हटाएँ, वेल्डिंग रोकें, और फिर घुंडी घुमाएँ।
गरम बत्ती जलने पर मशीन बंद कर देना: जब मशीन ज़्यादा गरम होने की बत्ती दिखाए, तो हड़बड़ी में मशीन का मुख्य स्विच बंद न करें। मशीन को चालू छोड़ दें ताकि पंखा चलता रहे। बंद करने पर अंदर फँसी गर्मी पुर्जों को नुक़सान पहुँचा सकती है।
टूटी हुई घुंडी से काम चलाना: कई दुकानों पर घुंडी का प्लास्टिक का ढक्कन टूट जाता है और कारीगर प्लास से पकड़कर अंदाज़े से करंट सेट करते हैं। यह अंदाज़े का काम आपके जोड़ को कमज़ोर बना सकता है।
सावधानियाँ
करंट की घुंडी प्लास्टिक की बनी होती है ताकि आपको करंट न लगे, लेकिन फिर भी गीले हाथों से या गीली ज़मीन पर खड़े होकर मशीन के बटन को हाथ न लगाएँ। सुरक्षा पहले है!
अगर आपकी मशीन की घुंडी ढीली हो गई है या बहुत टाइट घूम रही है, तो उसे ज़बरदस्ती न घुमाएँ। इसकी मरम्मत कैसे करनी है, यह हम आगे चलकर पाठ-43 में विस्तार से सीखेंगे। तब तक के लिए किसी अनुभवी मिस्त्री की मदद लें।
तेज़ दोहराव
करंट (एम्पीयर) = वेल्डिंग की आँच • कम करंट = ठंडा टाँका, छड़ का चिपकना • ज़्यादा करंट = लोहा जलना, चादर में छेद होना • पहला गुरु = छड़ के डिब्बे पर छपा करंट का दायरा • सही करंट की आवाज़ = कड़ाही में तड़के जैसी चरचराहट • गरम-सूचक बत्ती जलने पर मशीन चालू रखें, पंखे को ठंडा करने दें • वेल्डिंग करते समय कभी भी घुंडी न घुमाएँ।
छोटी परीक्षा (Quiz)
1. अगर वेल्डिंग करते समय छड़ बार-बार लोहे से चिपक रही है, तो इसका क्या कारण हो सकता है?
2. सही करंट सेट होने पर मशीन से कैसी आवाज़ आती है?
3. वेल्डिंग करते समय करंट की घुंडी घुमाने से मशीन को क्या नुक़सान हो सकता है?
4. मशीन की गरम-सूचक (Overheat) बत्ती जलने पर पहला क़दम क्या होना चाहिए?
5. हमें करंट सेट करने के लिए पहला अंदाज़ा कहाँ से मिलता है?
अपने उत्तर अपनी डायरी में लिखें और AI साथी से उनकी जाँच करवाएँ।
पाठ का सार (Chapter Summary)
इस पाठ में हमने सीखा कि वेल्डिंग मशीन का करंट (एम्पीयर) असल में बिजली की आँच है, जिसे सही सेट करना बेहद ज़रूरी है। कम करंट से टाँका ठंडा रहता है और छड़ चिपकती है, जबकि ज़्यादा करंट से लोहा जल जाता है और छेद हो जाते हैं। सही करंट का चुनाव इलेक्ट्रोड और चादर की मोटाई के आधार पर किया जाता है, जिसका शुरुआती दायरा छड़ के डिब्बे पर लिखा होता है। एक कुशल कारीगर वेल्डिंग की चरचराहट वाली सुरीली आवाज़ सुनकर ही पहचान लेता है कि करंट सही है या नहीं। इसके अलावा, हमने सीखा कि मशीन के गरम होने पर उसे बंद नहीं करना चाहिए बल्कि पंखे की हवा से ठंडा होने देना चाहिए, और कभी भी वेल्डिंग करते समय करंट की घुंडी को नहीं छूना चाहिए।
आगे क्या सीखें
अब आप मशीन के बटन और उसकी आँच को नियंत्रित करना सीख चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह बिजली भी दो अलग-अलग स्वभाव की होती है? एक जो सीधे चलती है और दूसरी जो अपनी दिशा बदलती रहती है। अगले पाठ में हम इसी मिज़ाज को समझेंगे — पाठ-33: AC और DC — बिजली के दो मिज़ाज।
वीडियो (Video)
इस पाठ का जाँचा-परखा वीडियो जल्द यहीं जुड़ेगा। तब तक दो जीवित रास्ते —
🎬 YouTube पर इस पाठ के वीडियो खोजें 🏛️ BharatSkills सरकारी वीडियो-मंच
(दोनों नई खिड़की में; वीडियो बिना भी पाठ पूरा — पढ़ाई कहीं नहीं रुकती।)
