अप्लाइड कंप्यूटर स्कूल™
130 भाषा में, गाँव से ग्लोबल साउथ तक! मूल भाषा: हिंदी

कोर्स › वेल्डिंग (Welding) कोर्स › हिस्सा-undefined: यंत्रों की पहचान

पाठ-32: मशीन के बटन-घुंडी — करंट घटाना-बढ़ाना

पढ़ाई का समय: 11-13 मिनट · पाठ 32 / 630 · पढ़ाई पूरी तरह मुफ़्त

📖 कोर्स-परिचय

📚 सब पाठ — किसी भी पाठ पर सीधे जाओ
पाठ-1 पाठ-2 पाठ-3 पाठ-4 पाठ-5 पाठ-6 पाठ-7 पाठ-8 पाठ-9 पाठ-10 पाठ-11 पाठ-12 पाठ-13 पाठ-14 पाठ-15 पाठ-16 पाठ-17 पाठ-18 पाठ-19 पाठ-20 पाठ-21 पाठ-22 पाठ-23 पाठ-24 पाठ-25 पाठ-26 पाठ-27 पाठ-28 पाठ-29 पाठ-30 पाठ-31 पाठ-32 (यही) पाठ-33 पाठ-34 पाठ-35 पाठ-36 पाठ-37 पाठ-38 पाठ-39 पाठ-40 पाठ-41 पाठ-42 पाठ-43 पाठ-44 पाठ-45 पाठ-46 पाठ-47 पाठ-48 पाठ-49 पाठ-50 पाठ-51 पाठ-52 पाठ-53 पाठ-54 पाठ-55 पाठ-56 पाठ-57 पाठ-58 पाठ-59 पाठ-60 पाठ-61 पाठ-62 पाठ-63 पाठ-64 पाठ-65 पाठ-66 पाठ-67 पाठ-68 पाठ-69 पाठ-70 पाठ-71 पाठ-72 पाठ-73 पाठ-74 पाठ-75 पाठ-76 पाठ-77 पाठ-78 पाठ-79 पाठ-80 पाठ-81 पाठ-82 पाठ-83 पाठ-84 पाठ-85 पाठ-86 पाठ-87 पाठ-88 पाठ-89 पाठ-90 पाठ-91 पाठ-92 पाठ-93 पाठ-94 पाठ-95 पाठ-96 पाठ-97 पाठ-98 पाठ-99 पाठ-100 पाठ-101 पाठ-102 पाठ-103 पाठ-104 पाठ-105 पाठ-106 पाठ-107 पाठ-108 पाठ-109 पाठ-110 पाठ-111 पाठ-112 पाठ-113 पाठ-114 पाठ-115 पाठ-116 पाठ-117 पाठ-118 पाठ-119 पाठ-120 पाठ-121 पाठ-122 पाठ-123 पाठ-124 पाठ-125 पाठ-126 पाठ-127 पाठ-128 पाठ-129 पाठ-130 पाठ-131 पाठ-132 पाठ-133 पाठ-134 पाठ-135 पाठ-136 पाठ-137 पाठ-138 पाठ-139 पाठ-140 पाठ-141 पाठ-142 पाठ-143 पाठ-144 पाठ-145 पाठ-146 पाठ-147 पाठ-148 पाठ-149 पाठ-150 पाठ-151 पाठ-152 पाठ-153 पाठ-154 पाठ-155 पाठ-156 पाठ-157 पाठ-158 पाठ-159 पाठ-160 पाठ-161 पाठ-162 पाठ-163 पाठ-164 पाठ-165 पाठ-166 पाठ-167 पाठ-168 पाठ-169 पाठ-170 पाठ-171 पाठ-172 पाठ-173 पाठ-174 पाठ-175 पाठ-176 पाठ-177 पाठ-178 पाठ-179 पाठ-180 पाठ-181 पाठ-182 पाठ-183 पाठ-184 पाठ-185 पाठ-186 पाठ-187 पाठ-188 पाठ-189 पाठ-190 पाठ-191 पाठ-192 पाठ-193 पाठ-194 पाठ-195 पाठ-196 पाठ-197 पाठ-198 पाठ-199 पाठ-200 पाठ-201 पाठ-202 पाठ-203 पाठ-204 पाठ-205 पाठ-206 पाठ-207 पाठ-208 पाठ-209 पाठ-210 पाठ-211 पाठ-212 पाठ-213 पाठ-214 पाठ-215 पाठ-216 पाठ-217 पाठ-218 पाठ-219 पाठ-220 पाठ-221 पाठ-222 पाठ-223 पाठ-224 पाठ-225 पाठ-226 पाठ-227 पाठ-228 पाठ-229 पाठ-230 पाठ-231 पाठ-232 पाठ-233 पाठ-234 पाठ-235 पाठ-236 पाठ-237 पाठ-238 पाठ-239 पाठ-240 पाठ-241 पाठ-242 पाठ-243 पाठ-244 पाठ-245 पाठ-246 पाठ-247 पाठ-248 पाठ-249 पाठ-250 पाठ-251 पाठ-252 पाठ-253 पाठ-254 पाठ-255 पाठ-256 पाठ-257 पाठ-258 पाठ-259 पाठ-260 पाठ-261 पाठ-262 पाठ-263 पाठ-264 पाठ-265 पाठ-266 पाठ-267 पाठ-268 पाठ-269 पाठ-270 पाठ-271 पाठ-272 पाठ-273 पाठ-274 पाठ-275 पाठ-276 पाठ-277 पाठ-278 पाठ-279 पाठ-280 पाठ-281 पाठ-282 पाठ-283 पाठ-284 पाठ-285 पाठ-286 पाठ-287 पाठ-288 पाठ-289 पाठ-290 पाठ-291 पाठ-292 पाठ-293 पाठ-294 पाठ-295 पाठ-296 पाठ-297 पाठ-298 पाठ-299 पाठ-300 पाठ-301 पाठ-302 पाठ-303 पाठ-304 पाठ-305 पाठ-306 पाठ-307 पाठ-308 पाठ-309 पाठ-310 पाठ-311 पाठ-312 पाठ-313 पाठ-314 पाठ-315 पाठ-316 पाठ-317 पाठ-318 पाठ-319 पाठ-320 पाठ-321 पाठ-322 पाठ-323 पाठ-324 पाठ-325 पाठ-326 पाठ-327 पाठ-328 पाठ-329 पाठ-330 पाठ-331 पाठ-332 पाठ-333 पाठ-334 पाठ-335 पाठ-336 पाठ-337 पाठ-338 पाठ-339 पाठ-340 पाठ-341 पाठ-342 पाठ-343 पाठ-344 पाठ-345 पाठ-346 पाठ-347 पाठ-348 पाठ-349 पाठ-350 पाठ-351 पाठ-352 पाठ-353 पाठ-354 पाठ-355 पाठ-356 पाठ-357 पाठ-358 पाठ-359 पाठ-360 पाठ-361 पाठ-362 पाठ-363 पाठ-364 पाठ-365 पाठ-366 पाठ-367 पाठ-368 पाठ-369 पाठ-370 पाठ-371 पाठ-372 पाठ-373 पाठ-374 पाठ-375 पाठ-376 पाठ-377 पाठ-378 पाठ-379 पाठ-380 पाठ-381 पाठ-382 पाठ-383 पाठ-384 पाठ-385 पाठ-386 पाठ-387 पाठ-388 पाठ-389 पाठ-390 पाठ-391 पाठ-392 पाठ-393 पाठ-394 पाठ-395 पाठ-396 पाठ-397 पाठ-398 पाठ-399 पाठ-400 पाठ-401 पाठ-402 पाठ-403 पाठ-404 पाठ-405 पाठ-406 पाठ-407 पाठ-408 पाठ-409 पाठ-410 पाठ-411 पाठ-412 पाठ-413 पाठ-414 पाठ-415 पाठ-416 पाठ-417 पाठ-418 पाठ-419 पाठ-420 पाठ-421 पाठ-422 पाठ-423 पाठ-424 पाठ-425 पाठ-426 पाठ-427 पाठ-428 पाठ-429 पाठ-430 पाठ-431 पाठ-432 पाठ-433 पाठ-434 पाठ-435 पाठ-436 पाठ-437 पाठ-438 पाठ-439 पाठ-440 पाठ-441 पाठ-442 पाठ-443 पाठ-444 पाठ-445 पाठ-446 पाठ-447 पाठ-448 पाठ-449 पाठ-450 पाठ-451 पाठ-452 पाठ-453 पाठ-454 पाठ-455 पाठ-456 पाठ-457 पाठ-458 पाठ-459 पाठ-460 पाठ-461 पाठ-462 पाठ-463 पाठ-464 पाठ-465 पाठ-466 पाठ-467 पाठ-468 पाठ-469 पाठ-470 पाठ-471 पाठ-472 पाठ-473 पाठ-474 पाठ-475 पाठ-476 पाठ-477 पाठ-478 पाठ-479 पाठ-480 पाठ-481 पाठ-482 पाठ-483 पाठ-484 पाठ-485 पाठ-486 पाठ-487 पाठ-488 पाठ-489 पाठ-490 पाठ-491 पाठ-492 पाठ-493 पाठ-494 पाठ-495 पाठ-496 पाठ-497 पाठ-498 पाठ-499 पाठ-500 पाठ-501 पाठ-502 पाठ-503 पाठ-504 पाठ-505 पाठ-506 पाठ-507 पाठ-508 पाठ-509 पाठ-510 पाठ-511 पाठ-512 पाठ-513 पाठ-514 पाठ-515 पाठ-516 पाठ-517 पाठ-518 पाठ-519 पाठ-520 पाठ-521 पाठ-522 पाठ-523 पाठ-524 पाठ-525 पाठ-526 पाठ-527 पाठ-528 पाठ-529 पाठ-530 पाठ-531 पाठ-532 पाठ-533 पाठ-534 पाठ-535 पाठ-536 पाठ-537 पाठ-538 पाठ-539 पाठ-540 पाठ-541 पाठ-542 पाठ-543 पाठ-544 पाठ-545 पाठ-546 पाठ-547 पाठ-548 पाठ-549 पाठ-550 पाठ-551 पाठ-552 पाठ-553 पाठ-554 पाठ-555 पाठ-556 पाठ-557 पाठ-558 पाठ-559 पाठ-560 पाठ-561 पाठ-562 पाठ-563 पाठ-564 पाठ-565 पाठ-566 पाठ-567 पाठ-568 पाठ-569 पाठ-570 पाठ-571 पाठ-572 पाठ-573 पाठ-574 पाठ-575 पाठ-576 पाठ-577 पाठ-578 पाठ-579 पाठ-580 पाठ-581 पाठ-582 पाठ-583 पाठ-584 पाठ-585 पाठ-586 पाठ-587 पाठ-588 पाठ-589 पाठ-590 पाठ-591 पाठ-592 पाठ-593 पाठ-594 पाठ-595 पाठ-596 पाठ-597 पाठ-598 पाठ-599 पाठ-600 पाठ-601 पाठ-602 पाठ-603 पाठ-604 पाठ-605 पाठ-606 पाठ-607 पाठ-608 पाठ-609 पाठ-610 पाठ-611 पाठ-612 पाठ-613 पाठ-614 पाठ-615 पाठ-616 पाठ-617 पाठ-618 पाठ-619 पाठ-620 पाठ-621 पाठ-622 पाठ-623 पाठ-624 पाठ-625 पाठ-626 पाठ-627 पाठ-628 पाठ-629 पाठ-630

पाठ परिचय

पाठ-21 (दो परिवार) में हमने वेल्डिंग मशीनों के दो बड़े परिवारों से दोस्ती की थी — भारी-भरकम ट्रांसफार्मर (Transformer) और हल्का-फुल्का इन्वर्टर (Inverter)। फिर पाठ-22 (नाम-पट्टी/Duty Cycle) में हमने मशीन का आधार-कार्ड यानी उसकी नाम-पट्टी पढ़ना सीखा था, ताकि हमें पता रहे कि हमारी मशीन की सीमा क्या है।

आज हम उससे एक कदम आगे बढ़ेंगे। जब आप मशीन के सामने खड़े होते हैं, तो उस पर कुछ बटन और एक गोल घूमने वाली घुंडी (Knob) दिखाई देती है। यह घुंडी ही मशीन का स्टीयरिंग व्हील है। जैसे ट्रैक्टर को खेत में जोतते समय सही गियर और रेस देनी पड़ती है, वैसे ही मज़बूत वेल्डिंग के लिए मशीन की इस घुंडी से सही बात करनी आनी चाहिए।

आज के पाठ में हम सीखेंगे कि इस घुंडी को कब, कितना और क्यों घुमाना है, और मशीन पर लगी बत्तियाँ हमें क्या इशारा करती हैं।

सीखने का उद्देश्य

इस पाठ को पूरा करने के बाद आप ये बातें अच्छी तरह समझ जाएँगे:

1. करंट (Current) यानी एम्पीयर (Ampere) की घुंडी कैसे काम करती है और इसे सही जगह सेट करना क्यों ज़रूरी है।
2. चादर और इलेक्ट्रोड की मोटाई देखकर सही करंट चुनने का मोटा नियम क्या है।
3. मशीन के अन्य बटन, पंखे और गरम-सूचक बत्ती (Overheat Indicator) का क्या मतलब है।
4. बिना किसी मीटर के, केवल कान से आवाज़ सुनकर सही करंट की पहचान कैसे की जाती है।

मुख्य बात — करंट की आँच और मशीन के इशारे

वेल्डिंग मशीन में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है करंट (Current), जिसे हम तकनीकी भाषा में एम्पीयर (Ampere) कहते हैं। इसे आप अपनी रसोई के चूल्हे की आँच की तरह समझ सकते हैं।

1. करंट का पूरा खेल: आँच कम या ज़्यादा?
अगर आप करंट की घुंडी को बहुत कम पर रखेंगे, तो वेल्डिंग की आँच ठंडी रह जाएगी। इसे हम ठंडा टाँका (Cold Weld) कहते हैं। इसमें इलेक्ट्रोड (Electrode) यानी वेल्डिंग छड़ बार-बार लोहे से चिपकेगी, पिघला हुआ लोहा बहेगा नहीं और जोड़ बहुत कमज़ोर बनेगा।
इसके विपरीत, अगर आप करंट बहुत ज़्यादा बढ़ा देंगे, तो आँच इतनी तेज़ हो जाएगी कि लोहा पिघलने के बजाय जलने लगेगा। पतली चादर होगी तो उसमें बड़ा-सा छेद (Blow through) हो जाएगा, और वेल्डिंग करते समय बहुत सारे जलते हुए छींटे (Spatter) उड़ेंगे।

2. करंट चुनने का मोटा नियम:
सही करंट का चुनाव दो चीज़ों पर निर्भर करता है — पहली, जिस लोहे की चादर को आप जोड़ रहे हैं उसकी मोटाई; और दूसरी, आपके होल्डर (Holder) में लगी वेल्डिंग छड़ की मोटाई।
पाठ-26 (छड़-नंबर व डिब्बे का दायरा) याद कीजिए। वेल्डिंग छड़ के डिब्बे पर हमेशा एक करंट का दायरा छपा होता है (जैसे 80 से 120 एम्पीयर)। वह डिब्बा ही आपका पहला गुरु है। शुरुआत हमेशा उस दायरे के बीच से करनी चाहिए।

3. मशीन के बाक़ी बटन और बत्तियाँ:
मशीन पर एक मुख्य चालू-बंद स्विच (ON/OFF Switch) होता है। इसके अलावा आज की आधुनिक मशीनों पर एक गरम-सूचक बत्ती (Overheat Indicator) होती है। पाठ-22 में हमने ड्यूटी साइकिल (Duty Cycle) पढ़ा था। जब मशीन लगातार काम करके बहुत गरम हो जाती है, तो यह पीली या लाल बत्ती जल उठती है। इसका मतलब है मशीन थक गई है। ऐसे में मशीन का बटन बंद नहीं करना है! मशीन को चालू रहने दें ताकि उसका पंखा (Fan) घूमता रहे और अंदर के पुर्जों को जल्दी ठंडा कर दे। जब बत्ती बुझ जाए, तब दोबारा वेल्डिंग शुरू करें।

4. कान से पहचानिए सही करंट:
एक अच्छा कारीगर आँखों से ज़्यादा अपने कानों का इस्तेमाल करता है।
• सही करंट: जब करंट एकदम सही होगा, तो वेल्डिंग करते समय एक जैसी, बिना रुके चरचराहट की आवाज़ आएगी। यह आवाज़ वैसी ही होती है जैसी रसोई में गरम तेल में राई या जीरे का तड़का लगाने पर आती है।
• ज़्यादा करंट: अगर करंट बहुत ज़्यादा है, तो आवाज़ भड़-भड़ करके धमाके जैसी आएगी, जैसे छोटे पटाखे फूट रहे हों।
• कम करंट: अगर करंट बहुत कम है, तो आवाज़ बहुत धीमी होगी या फिर बार-बार चिप-चिप की अटकने वाली आवाज़ आएगी।

5. नई मशीन पर पहला काम:
जब भी आप किसी नई दुकान पर जाएँ या नई मशीन हाथ में लें, तो सीधे मुख्य काम शुरू न करें। पहले लोहे का एक बेकार टुकड़ा (Scrap Metal) लें। उस पर घुंडी को घुमा-घुमाकर अलग-अलग करंट पर वेल्डिंग करें और उसकी आवाज़ को कान में बिठाएँ।

चित्र से समझिए

मशीन की घुंडी और करंट का असर मशीन की घुंडी और करंट का असर 100 A गरम करंट घुंडी कम करंट: चिपका, ऊँचा टाँका सही करंट: सपाट, एकसार ज़्यादा करंट: छेद और छींटे कान से पहचानिए (Sound Check) कम करंट = चुपचाप या रुक-रुक कर चलना सही करंट = लगातार चर-चर (तड़के जैसी आवाज़) ज़्यादा करंट = भड़-भड़ (पटाखे जैसी आवाज़)
मशीन का कंट्रोल पैनल (बाएँ) और तीन अलग-अलग करंट पर बनने वाले टाँकों का अंतर (दाएँ)।

आसान भाषा में समझिए

इसे अपने घर की रसोई से समझिए। मान लीजिए आप तवे पर रोटी बना रहे हैं।

अगर गैस की आँच बहुत धीमी होगी, तो रोटी पकेगी नहीं। वह तवे पर पड़ी-पड़ी सूख जाएगी, कड़क हो जाएगी और खाने लायक़ नहीं बचेगी। वेल्डिंग में कम करंट का यही हाल होता है — लोहा पिघलता नहीं, बस छड़ चिपकती रहती है और ऊपर एक कमज़ोर पपड़ी जम जाती है।

और अगर आपने गैस की आँच को बिल्कुल तेज़ कर दिया, तो क्या होगा? रोटी तवे पर जाते ही जलकर काली हो जाएगी, पर अंदर से कच्ची ही रहेगी। वेल्डिंग में ज़्यादा करंट रखने पर भी यही होता है — लोहा पिघलकर बह जाता है, चादर में छेद हो जाता है और जोड़ अंदर से खोखला रह जाता है।

जैसे हर खाने की अपनी आँच होती है — चाय तेज़ आँच पर उबाली जाती है पर खीर को धीमी आँच पर पकाया जाता है — वैसे ही वेल्डिंग में हर मोटाई के लोहे के लिए करंट की अपनी निश्चित आँच होती है। पतले पाइप के लिए कम आँच (कम करंट) और भारी चैनल या गाडर के लिए तेज़ आँच (ज़्यादा करंट)।

असली उदाहरण — उस्ताद की बीस नंबर की जादूगरी

हमारी दुकान पर एक नया लड़का आया था — मदन। वह बहुत मेहनती था, लेकिन वेल्डिंग करते समय उसका हाथ बहुत काँपता था। एक दिन वह लोहे की खिड़की के फ़्रेम पर टाँका लगा रहा था। उसकी वेल्डिंग छड़ बार-बार लोहे से चिपक जाती थी। वह झुँझला गया और अपनी छड़ को ही दोष देने लगा — "उस्ताद, यह छड़ सीलन खाई हुई है, बेकार है, काम ही नहीं कर रही!"

उस्ताद मुस्कुराए। उन्होंने मदन के हाथ से होल्डर लिया और मशीन की तरफ़ देखा। मशीन पर करंट की घुंडी केवल 70 एम्पीयर पर सेट थी, जबकि मदन 3.15 मिलीमीटर (Millimeter) की मोटी छड़ इस्तेमाल कर रहा था। इतने कम करंट पर तो छड़ चिपकेगी ही!

उस्ताद ने बिना कुछ कहे घुंडी को घुमाया और करंट को बढ़ाकर 110 एम्पीयर पर कर दिया। फिर उन्होंने जैसे ही छड़ को लोहे से छुआया, मशीन से एक सुरीली, लगातार चरचराने वाली आवाज़ आने लगी। टाँका मक्खन की तरह बहने लगा और एक ही बार में मज़बूत जोड़ बन गया। मदन हैरान रह गया।

उस्ताद ने समझाया — "मदन, औज़ार को गाली देने से पहले मशीन के मिज़ाज को समझो। छड़ गीली नहीं थी, बस तुम्हारी आँच कम थी।"

AI के साथ अभ्यास

अपने मोबाइल पर AI साथी से ये सवाल पूछकर बातचीत कीजिए:

1. "मेरे पास 3 मिलीमीटर मोटी लोहे की चादर है और मैं 2.5 मिलीमीटर की 6013 नंबर वाली छड़ इस्तेमाल कर रहा हूँ। मुझे मशीन का करंट कितने पर रखना चाहिए?"
2. "अगर मैं पतले पाइप पर वेल्डिंग कर रहा हूँ और उसमें बार-बार छेद हो जा रहे हैं, तो मुझे करंट कितना कम करना चाहिए?"
3. "क्या अलग-अलग वेल्डिंग पोजीशन (जैसे खड़ी वेल्डिंग या सिर के ऊपर की वेल्डिंग) में भी करंट की घुंडी बदलनी पड़ती है?"

आज ही करने का काम (Step-by-Step गतिविधि)

आज अपनी दुकान या ट्रेनिंग सेंटर पर जाकर यह अभ्यास खुद करें:

1. पहला कदम: मशीन बंद हालत में हो, तब उसके सामने खड़े होकर उसकी करंट घुंडी को ध्यान से देखें। देखें कि उस पर नंबर कहाँ से कहाँ तक लिखे हैं (जैसे 0 से 200 या 300 तक)।
2. दूसरा कदम: वेल्डिंग छड़ का डिब्बा उठाएँ और उस पर लिखे करंट के दायरे को पढ़ें। अपनी डायरी में लिखें कि 2.5 मिमी और 3.15 मिमी की छड़ के लिए क्या दायरा लिखा है।
3. तीसरा कदम: एक बेकार लोहे का टुकड़ा लें। मशीन चालू करें और करंट को बहुत कम (मान लीजिए 50 एम्पीयर) पर सेट करें। वेल्डिंग करने की कोशिश करें और देखें कि छड़ कैसे चिपकती है।
4. चौथा कदम: अब करंट को बहुत ज़्यादा (मान लीजिए 160 एम्पीयर) पर सेट करें। एक सेकंड के लिए वेल्डिंग छुएँ और उड़ते हुए छींटों और तेज़ आवाज़ को महसूस करें।
5. पाँचवाँ कदम: अब करंट को डिब्बे पर लिखे सही दायरे के बीच में (लगभग 100 एम्पीयर) पर लाएँ। अब वेल्डिंग करें और उस सुरीली 'चर-चर' की आवाज़ को अपने दिमाग में बिठा लें।

आम गलतियाँ

चलते टाँके के बीच में घुंडी घुमाना: यह सबसे बड़ी और ख़तरनाक ग़लती है। जब वेल्डिंग चल रही हो (यानी आर्क बन रहा हो), उस समय करंट की घुंडी को कभी नहीं घुमाना चाहिए। इससे मशीन के अंदर बहुत भारी स्पार्क होता है और मशीन के महँगे पुर्जे तुरंत जल सकते हैं। हमेशा पहले होल्डर को हटाएँ, वेल्डिंग रोकें, और फिर घुंडी घुमाएँ।

गरम बत्ती जलने पर मशीन बंद कर देना: जब मशीन ज़्यादा गरम होने की बत्ती दिखाए, तो हड़बड़ी में मशीन का मुख्य स्विच बंद न करें। मशीन को चालू छोड़ दें ताकि पंखा चलता रहे। बंद करने पर अंदर फँसी गर्मी पुर्जों को नुक़सान पहुँचा सकती है।

टूटी हुई घुंडी से काम चलाना: कई दुकानों पर घुंडी का प्लास्टिक का ढक्कन टूट जाता है और कारीगर प्लास से पकड़कर अंदाज़े से करंट सेट करते हैं। यह अंदाज़े का काम आपके जोड़ को कमज़ोर बना सकता है।

सावधानियाँ

करंट की घुंडी प्लास्टिक की बनी होती है ताकि आपको करंट न लगे, लेकिन फिर भी गीले हाथों से या गीली ज़मीन पर खड़े होकर मशीन के बटन को हाथ न लगाएँ। सुरक्षा पहले है!

अगर आपकी मशीन की घुंडी ढीली हो गई है या बहुत टाइट घूम रही है, तो उसे ज़बरदस्ती न घुमाएँ। इसकी मरम्मत कैसे करनी है, यह हम आगे चलकर पाठ-43 में विस्तार से सीखेंगे। तब तक के लिए किसी अनुभवी मिस्त्री की मदद लें।

तेज़ दोहराव

करंट (एम्पीयर) = वेल्डिंग की आँच • कम करंट = ठंडा टाँका, छड़ का चिपकना • ज़्यादा करंट = लोहा जलना, चादर में छेद होना • पहला गुरु = छड़ के डिब्बे पर छपा करंट का दायरा • सही करंट की आवाज़ = कड़ाही में तड़के जैसी चरचराहट • गरम-सूचक बत्ती जलने पर मशीन चालू रखें, पंखे को ठंडा करने दें • वेल्डिंग करते समय कभी भी घुंडी न घुमाएँ।

छोटी परीक्षा (Quiz)

1. अगर वेल्डिंग करते समय छड़ बार-बार लोहे से चिपक रही है, तो इसका क्या कारण हो सकता है?
2. सही करंट सेट होने पर मशीन से कैसी आवाज़ आती है?
3. वेल्डिंग करते समय करंट की घुंडी घुमाने से मशीन को क्या नुक़सान हो सकता है?
4. मशीन की गरम-सूचक (Overheat) बत्ती जलने पर पहला क़दम क्या होना चाहिए?
5. हमें करंट सेट करने के लिए पहला अंदाज़ा कहाँ से मिलता है?

अपने उत्तर अपनी डायरी में लिखें और AI साथी से उनकी जाँच करवाएँ।

पाठ का सार (Chapter Summary)

इस पाठ में हमने सीखा कि वेल्डिंग मशीन का करंट (एम्पीयर) असल में बिजली की आँच है, जिसे सही सेट करना बेहद ज़रूरी है। कम करंट से टाँका ठंडा रहता है और छड़ चिपकती है, जबकि ज़्यादा करंट से लोहा जल जाता है और छेद हो जाते हैं। सही करंट का चुनाव इलेक्ट्रोड और चादर की मोटाई के आधार पर किया जाता है, जिसका शुरुआती दायरा छड़ के डिब्बे पर लिखा होता है। एक कुशल कारीगर वेल्डिंग की चरचराहट वाली सुरीली आवाज़ सुनकर ही पहचान लेता है कि करंट सही है या नहीं। इसके अलावा, हमने सीखा कि मशीन के गरम होने पर उसे बंद नहीं करना चाहिए बल्कि पंखे की हवा से ठंडा होने देना चाहिए, और कभी भी वेल्डिंग करते समय करंट की घुंडी को नहीं छूना चाहिए।

आगे क्या सीखें

अब आप मशीन के बटन और उसकी आँच को नियंत्रित करना सीख चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह बिजली भी दो अलग-अलग स्वभाव की होती है? एक जो सीधे चलती है और दूसरी जो अपनी दिशा बदलती रहती है। अगले पाठ में हम इसी मिज़ाज को समझेंगे — पाठ-33: AC और DC — बिजली के दो मिज़ाज।

वीडियो (Video)

इस पाठ का जाँचा-परखा वीडियो जल्द यहीं जुड़ेगा। तब तक दो जीवित रास्ते —

🎬 YouTube पर इस पाठ के वीडियो खोजें 🏛️ BharatSkills सरकारी वीडियो-मंच

(दोनों नई खिड़की में; वीडियो बिना भी पाठ पूरा — पढ़ाई कहीं नहीं रुकती।)