अप्लाइड कंप्यूटर स्कूल™
130 भाषा में, गाँव से ग्लोबल साउथ तक! मूल भाषा: हिंदी

कोर्स › वेल्डिंग (Welding) कोर्स › हिस्सा-undefined: SMAW (छड़-वेल्डिंग) — पहला टाँका से महारत तक

पाठ-94: पूरी लाइन भरना — टैक से पक्के तक

पढ़ाई का समय: 11-13 मिनट · पाठ 94 / 630 · पढ़ाई पूरी तरह मुफ़्त

📖 कोर्स-परिचय

📚 सब पाठ — किसी भी पाठ पर सीधे जाओ
पाठ-1 पाठ-2 पाठ-3 पाठ-4 पाठ-5 पाठ-6 पाठ-7 पाठ-8 पाठ-9 पाठ-10 पाठ-11 पाठ-12 पाठ-13 पाठ-14 पाठ-15 पाठ-16 पाठ-17 पाठ-18 पाठ-19 पाठ-20 पाठ-21 पाठ-22 पाठ-23 पाठ-24 पाठ-25 पाठ-26 पाठ-27 पाठ-28 पाठ-29 पाठ-30 पाठ-31 पाठ-32 पाठ-33 पाठ-34 पाठ-35 पाठ-36 पाठ-37 पाठ-38 पाठ-39 पाठ-40 पाठ-41 पाठ-42 पाठ-43 पाठ-44 पाठ-45 पाठ-46 पाठ-47 पाठ-48 पाठ-49 पाठ-50 पाठ-51 पाठ-52 पाठ-53 पाठ-54 पाठ-55 पाठ-56 पाठ-57 पाठ-58 पाठ-59 पाठ-60 पाठ-61 पाठ-62 पाठ-63 पाठ-64 पाठ-65 पाठ-66 पाठ-67 पाठ-68 पाठ-69 पाठ-70 पाठ-71 पाठ-72 पाठ-73 पाठ-74 पाठ-75 पाठ-76 पाठ-77 पाठ-78 पाठ-79 पाठ-80 पाठ-81 पाठ-82 पाठ-83 पाठ-84 पाठ-85 पाठ-86 पाठ-87 पाठ-88 पाठ-89 पाठ-90 पाठ-91 पाठ-92 पाठ-93 पाठ-94 (यही) पाठ-95 पाठ-96 पाठ-97 पाठ-98 पाठ-99 पाठ-100 पाठ-101 पाठ-102 पाठ-103 पाठ-104 पाठ-105 पाठ-106 पाठ-107 पाठ-108 पाठ-109 पाठ-110 पाठ-111 पाठ-112 पाठ-113 पाठ-114 पाठ-115 पाठ-116 पाठ-117 पाठ-118 पाठ-119 पाठ-120 पाठ-121 पाठ-122 पाठ-123 पाठ-124 पाठ-125 पाठ-126 पाठ-127 पाठ-128 पाठ-129 पाठ-130 पाठ-131 पाठ-132 पाठ-133 पाठ-134 पाठ-135 पाठ-136 पाठ-137 पाठ-138 पाठ-139 पाठ-140 पाठ-141 पाठ-142 पाठ-143 पाठ-144 पाठ-145 पाठ-146 पाठ-147 पाठ-148 पाठ-149 पाठ-150 पाठ-151 पाठ-152 पाठ-153 पाठ-154 पाठ-155 पाठ-156 पाठ-157 पाठ-158 पाठ-159 पाठ-160 पाठ-161 पाठ-162 पाठ-163 पाठ-164 पाठ-165 पाठ-166 पाठ-167 पाठ-168 पाठ-169 पाठ-170 पाठ-171 पाठ-172 पाठ-173 पाठ-174 पाठ-175 पाठ-176 पाठ-177 पाठ-178 पाठ-179 पाठ-180 पाठ-181 पाठ-182 पाठ-183 पाठ-184 पाठ-185 पाठ-186 पाठ-187 पाठ-188 पाठ-189 पाठ-190 पाठ-191 पाठ-192 पाठ-193 पाठ-194 पाठ-195 पाठ-196 पाठ-197 पाठ-198 पाठ-199 पाठ-200 पाठ-201 पाठ-202 पाठ-203 पाठ-204 पाठ-205 पाठ-206 पाठ-207 पाठ-208 पाठ-209 पाठ-210 पाठ-211 पाठ-212 पाठ-213 पाठ-214 पाठ-215 पाठ-216 पाठ-217 पाठ-218 पाठ-219 पाठ-220 पाठ-221 पाठ-222 पाठ-223 पाठ-224 पाठ-225 पाठ-226 पाठ-227 पाठ-228 पाठ-229 पाठ-230 पाठ-231 पाठ-232 पाठ-233 पाठ-234 पाठ-235 पाठ-236 पाठ-237 पाठ-238 पाठ-239 पाठ-240 पाठ-241 पाठ-242 पाठ-243 पाठ-244 पाठ-245 पाठ-246 पाठ-247 पाठ-248 पाठ-249 पाठ-250 पाठ-251 पाठ-252 पाठ-253 पाठ-254 पाठ-255 पाठ-256 पाठ-257 पाठ-258 पाठ-259 पाठ-260 पाठ-261 पाठ-262 पाठ-263 पाठ-264 पाठ-265 पाठ-266 पाठ-267 पाठ-268 पाठ-269 पाठ-270 पाठ-271 पाठ-272 पाठ-273 पाठ-274 पाठ-275 पाठ-276 पाठ-277 पाठ-278 पाठ-279 पाठ-280 पाठ-281 पाठ-282 पाठ-283 पाठ-284 पाठ-285 पाठ-286 पाठ-287 पाठ-288 पाठ-289 पाठ-290 पाठ-291 पाठ-292 पाठ-293 पाठ-294 पाठ-295 पाठ-296 पाठ-297 पाठ-298 पाठ-299 पाठ-300 पाठ-301 पाठ-302 पाठ-303 पाठ-304 पाठ-305 पाठ-306 पाठ-307 पाठ-308 पाठ-309 पाठ-310 पाठ-311 पाठ-312 पाठ-313 पाठ-314 पाठ-315 पाठ-316 पाठ-317 पाठ-318 पाठ-319 पाठ-320 पाठ-321 पाठ-322 पाठ-323 पाठ-324 पाठ-325 पाठ-326 पाठ-327 पाठ-328 पाठ-329 पाठ-330 पाठ-331 पाठ-332 पाठ-333 पाठ-334 पाठ-335 पाठ-336 पाठ-337 पाठ-338 पाठ-339 पाठ-340 पाठ-341 पाठ-342 पाठ-343 पाठ-344 पाठ-345 पाठ-346 पाठ-347 पाठ-348 पाठ-349 पाठ-350 पाठ-351 पाठ-352 पाठ-353 पाठ-354 पाठ-355 पाठ-356 पाठ-357 पाठ-358 पाठ-359 पाठ-360 पाठ-361 पाठ-362 पाठ-363 पाठ-364 पाठ-365 पाठ-366 पाठ-367 पाठ-368 पाठ-369 पाठ-370 पाठ-371 पाठ-372 पाठ-373 पाठ-374 पाठ-375 पाठ-376 पाठ-377 पाठ-378 पाठ-379 पाठ-380 पाठ-381 पाठ-382 पाठ-383 पाठ-384 पाठ-385 पाठ-386 पाठ-387 पाठ-388 पाठ-389 पाठ-390 पाठ-391 पाठ-392 पाठ-393 पाठ-394 पाठ-395 पाठ-396 पाठ-397 पाठ-398 पाठ-399 पाठ-400 पाठ-401 पाठ-402 पाठ-403 पाठ-404 पाठ-405 पाठ-406 पाठ-407 पाठ-408 पाठ-409 पाठ-410 पाठ-411 पाठ-412 पाठ-413 पाठ-414 पाठ-415 पाठ-416 पाठ-417 पाठ-418 पाठ-419 पाठ-420 पाठ-421 पाठ-422 पाठ-423 पाठ-424 पाठ-425 पाठ-426 पाठ-427 पाठ-428 पाठ-429 पाठ-430 पाठ-431 पाठ-432 पाठ-433 पाठ-434 पाठ-435 पाठ-436 पाठ-437 पाठ-438 पाठ-439 पाठ-440 पाठ-441 पाठ-442 पाठ-443 पाठ-444 पाठ-445 पाठ-446 पाठ-447 पाठ-448 पाठ-449 पाठ-450 पाठ-451 पाठ-452 पाठ-453 पाठ-454 पाठ-455 पाठ-456 पाठ-457 पाठ-458 पाठ-459 पाठ-460 पाठ-461 पाठ-462 पाठ-463 पाठ-464 पाठ-465 पाठ-466 पाठ-467 पाठ-468 पाठ-469 पाठ-470 पाठ-471 पाठ-472 पाठ-473 पाठ-474 पाठ-475 पाठ-476 पाठ-477 पाठ-478 पाठ-479 पाठ-480 पाठ-481 पाठ-482 पाठ-483 पाठ-484 पाठ-485 पाठ-486 पाठ-487 पाठ-488 पाठ-489 पाठ-490 पाठ-491 पाठ-492 पाठ-493 पाठ-494 पाठ-495 पाठ-496 पाठ-497 पाठ-498 पाठ-499 पाठ-500 पाठ-501 पाठ-502 पाठ-503 पाठ-504 पाठ-505 पाठ-506 पाठ-507 पाठ-508 पाठ-509 पाठ-510 पाठ-511 पाठ-512 पाठ-513 पाठ-514 पाठ-515 पाठ-516 पाठ-517 पाठ-518 पाठ-519 पाठ-520 पाठ-521 पाठ-522 पाठ-523 पाठ-524 पाठ-525 पाठ-526 पाठ-527 पाठ-528 पाठ-529 पाठ-530 पाठ-531 पाठ-532 पाठ-533 पाठ-534 पाठ-535 पाठ-536 पाठ-537 पाठ-538 पाठ-539 पाठ-540 पाठ-541 पाठ-542 पाठ-543 पाठ-544 पाठ-545 पाठ-546 पाठ-547 पाठ-548 पाठ-549 पाठ-550 पाठ-551 पाठ-552 पाठ-553 पाठ-554 पाठ-555 पाठ-556 पाठ-557 पाठ-558 पाठ-559 पाठ-560 पाठ-561 पाठ-562 पाठ-563 पाठ-564 पाठ-565 पाठ-566 पाठ-567 पाठ-568 पाठ-569 पाठ-570 पाठ-571 पाठ-572 पाठ-573 पाठ-574 पाठ-575 पाठ-576 पाठ-577 पाठ-578 पाठ-579 पाठ-580 पाठ-581 पाठ-582 पाठ-583 पाठ-584 पाठ-585 पाठ-586 पाठ-587 पाठ-588 पाठ-589 पाठ-590 पाठ-591 पाठ-592 पाठ-593 पाठ-594 पाठ-595 पाठ-596 पाठ-597 पाठ-598 पाठ-599 पाठ-600 पाठ-601 पाठ-602 पाठ-603 पाठ-604 पाठ-605 पाठ-606 पाठ-607 पाठ-608 पाठ-609 पाठ-610 पाठ-611 पाठ-612 पाठ-613 पाठ-614 पाठ-615 पाठ-616 पाठ-617 पाठ-618 पाठ-619 पाठ-620 पाठ-621 पाठ-622 पाठ-623 पाठ-624 पाठ-625 पाठ-626 पाठ-627 पाठ-628 पाठ-629 पाठ-630

पाठ परिचय

टैक की अदालत पास हुई — अब वह काम जिस पर नए और पके हाथ का फ़र्क़ सबसे साफ़ दिखता है: पूरी लाइन की भराई — टैक-खूँटों के बीच की दूरी को एक पक्के, अटूट-दिखते टाँके में बदलना। नए हाथ की भरी लाइन दूर से ही चुगली करती है — जगह-जगह गाँठें, जोड़ाई के गड्ढे, टैकों पर उभार; पके हाथ की लाइन ऐसी बहती है जैसे एक ही साँस में खिंची हो — हालाँकि वह भी टुकड़ों में ही बनी होती है। राज़ तीन रीतों में है: क्रम (टुकड़े आर-पार), जोड़ाई (नया टुकड़ा पिछले सिरे को पिघलाकर शुरू), और टैक-पार (खूँटे को घोलते हुए गुज़रना)। तीनों आज हाथ पर उतरेंगी — और साथ में सिरे के गड्ढे की वह बारीकी भी, जिसे भरना पकी लिखावट की आख़िरी बिंदी है।

नई शुरुआत — पिछले सिरे से टुकड़ों में बनी — एक लड़ी दिखी
पीला मोती पिछली लड़ी के सिरे पर चढ़कर जला — जोड़ाई का पूरा राज़ यही है।

सीखने का उद्देश्य

इस पाठ के बाद आप: (1) बालिश्त-भर टुकड़ों और आर-पार क्रम से लंबी लाइन भरना सीख लेंगे, (2) जोड़ाई की रीत — पिछले सिरे को पिघलाकर आगे — हाथ में उतार लेंगे, (3) टैक के ऊपर से घोलते हुए गुज़रना सीख लेंगे, और (4) सिरे के गड्ढे की पहचान-भराई जान लेंगे।

मुख्य बात — क्रम, जोड़ाई, टैक-पार, सिरा

(1) क्रम — महानियम का मैदान। लंबी लाइन एक साँस में कभी नहीं (पाठ-62): बालिश्त-भर के टुकड़े, आर-पार बाँटकर — पहला टुकड़ा एक सिरे से, दूसरा सामने वाले सिरे से, फिर बीच। हर टुकड़े के बाद एक साँस — धातु की भी (ठंडक की मोहलत), आपकी भी (कंधा ढीला — पाठ-83 की साँस-कुंजी): थका हाथ और तपी धातु, दोनों अगली ग़लती की तैयारी हैं।

(2) जोड़ाई — नए हाथ की सबसे बड़ी चोरी यहीं पकड़ी जाती है। नया टुकड़ा सीधी नई जगह से शुरू किया तो हर जोड़ाई पर गाँठ-गड्ढा — लाइन मनकों की टूटी माला दिखती है। रीत: नए टुकड़े का आर्क पिछले टाँके के सिरे से ज़रा पीछे चढ़कर जलाइए, पहले उस ठंडे सिरे को पल-भर पिघलाइए — जब वह दोबारा तालाब बने, तब आगे बढ़िए। पुराना और नया एक ही तालाब में घुलकर एक लड़ी हो जाते हैं — जोड़ाई ढूँढे नहीं मिलती।

(3) टैक-पार — घोलते हुए गुज़रो। भरते-भरते टैक आए तो रुकिए मत, कूदिए भी मत — चाल ज़रा धीमी कर उसे पिघलाते हुए पार कीजिए: साफ़-सुथरा (पपड़ी-उतरा — पाठ-93) टैक टाँके में घुलकर ग़ायब हो जाता है। रुक गए तो टैक पर ढेर; कूद गए तो टैक के दोनों ओर कच्ची साँधें।

(4) सिरे का गड्ढा। हर टुकड़े के आख़िर में, जहाँ आर्क उठता है, तालाब एक छोटा कटोरा-गड्ढा छोड़ता है — यही जमकर सिकुड़न-दरार का घर बनता है (पाठ-62 का खिंचाव सबसे पहले पतली जगह पकड़ता है)। रीत: आर्क उठाने से पहले सिरे पर पल-भर ठहरकर या ज़रा पीछे लौटकर कटोरा भर दीजिए — फिर उठाइए। लाइन के बिल्कुल आख़िरी सिरे पर यह दुगने ध्यान से।

(5) जाँच वही तिहरी। हर टुकड़े पर आँख तालाब पर (पाठ-84), कान सुर पर (पाठ-87); पूरी लाइन के बाद पपड़ी उतारकर लड़ी-पढ़ाई (पाठ-86) — जोड़ाइयाँ ढूँढिए: दिखें तो अगली बार पीछे-चढ़ाई और बढ़ाइए।

चित्र से समझिए

जोड़ाई — दो रीतें नई जगह से शुरू ✘ — बीच में गाँठ-गड्ढा (काला मनका = टूटी माला की चुगली) पीछे चढ़कर शुरू ✔ — सिरा पिघला, लड़ी एक (नीली पट्टी = चढ़ाई — पुराने पर नया) टैक-पार: धीमे, घोलते हुए सिरे का कटोरा भरो — पल-भर ठहरकर, तब आर्क उठाओ
ऊपर ग़लत-सही जोड़ाई, बीच में टैक-घुलाई, नीचे सिरे की बिंदी — पकी लिखावट के तीन राज़।

आसान भाषा में समझिए

दीवार की पुताई करने वाले को देखिए — नया हाथ जहाँ ब्रश दोबारा लगाता है वहाँ धारी छोड़ता है; पका पुताई-वाला नया ब्रश हमेशा गीले पर चढ़ाकर लगाता है — सूखे किनारे पर नया रंग चढ़े तो जोड़ की धारी बनती है, गीले पर चढ़े तो घुल जाती है। भराई की जोड़ाई वही गीले-पर-चढ़ाई है — बस आपका "गीला" पिघला तालाब है, और उसे दोबारा गीला करने के लिए पल-भर पीछे लौटना पड़ता है।

असली उदाहरण — माला के मनके गिनने वाला ग्राहक

गेट की लंबी सीवन भरकर लड़के ने पपड़ी उतारी — लाइन ठीक-ठाक दिखी। पर उस्ताद ने उँगली लाइन पर फिराई और चार जगह रोकी — "यहाँ, यहाँ, यहाँ, यहाँ — तूने चार बार साँस ली।" चारों जोड़ाइयों पर हल्के गड्ढे-गाँठें थीं, नई जगह से शुरू करने की चुगली। उस्ताद ने अगली सीवन पर रीत बदलवाई — "हर नया टुकड़ा पिछले के सिरे पर चढ़कर जला; पहले पुराने को जगा, फिर आगे चल।" शाम की लाइन पर उस्ताद की उँगली बिना रुके सिरे तक चली गई। "अब गिन, कितने टुकड़े थे?" लड़का ख़ुद नहीं गिन पाया — छह टुकड़े एक लड़ी बन चुके थे। उस्ताद मुस्कुराया — "ग्राहक भी यही उँगली फिराता है बेटा — फ़र्क़ इतना है कि वह गड्ढा मिलते ही दाम घटाता है। जोड़ाई वह सिलाई है जो दिखनी नहीं चाहिए।"

AI के साथ अभ्यास

ACS के AI साथी से कहिए: "भराई की चारों रीतें — क्रम, जोड़ाई, टैक-पार, सिरे का कटोरा — मुझसे क़दम-दर-क़दम बुलवाओ; फिर तीन बिगड़ी सूरतें दो (बीच-बीच गाँठें / टैकों पर उभार / आख़िर में दरार) और जड़ पकड़वाओ।" हर जड़ का जवाब इसी पाठ की एक रीत होगी — मिलान कीजिए।

आज ही करने का काम (Step-by-Step गतिविधि)

(1) कल की टैक-लगी पट्टी (पाठ-93 वाली) उठाइए — या नई जमाइए — और भराई का आर-पार नक़्शा चॉक से लिखिए: 1, 2, 3 के अंक टुकड़ों पर। (2) पहला टुकड़ा भरकर रुकिए; नया टुकड़ा जान-बूझकर पिछले सिरे से पीछे चढ़कर शुरू कीजिए — चढ़ाई का हाथ पहली बार में अटपटा लगेगा, तीसरी में बैठ जाएगा। (3) बीच का टैक धीमी चाल में घोलते हुए पार कीजिए। (4) आख़िरी सिरे पर कटोरा भरना मत भूलिए — पल-भर ठहराव। (5) पपड़ी उतारकर उँगली-परीक्षा (दस्ताने से): जोड़ाइयाँ ढूँढिए और कॉपी में गिनती लिखिए — आज कितनी पकड़ में आईं; यही अंक हफ़्ते भर में गिरता देखिए।

आम गलतियाँ

(1) पूरी लाइन एक साँस में — महानियम की सीधी अवहेलना (टेढ़ापन + थकान)। (2) नया टुकड़ा नई जगह से — मनकों की टूटी माला। (3) टैक पर रुक जाना या कूद जाना — ढेर या कच्ची साँधें। (4) आख़िरी सिरे का कटोरा खुला छोड़ना — वहीं से दरार की शुरुआत। (5) जोड़ाई छिपाने को उस पर मोटा ढेर चढ़ा देना — गाँठ ढँकती नहीं, बड़ी होती है; इलाज रीत में है, ढेर में नहीं।

सावधानियाँ

लंबी भराई लंबा तपाती है — टुकड़ों के बीच की साँस में पट्टी-क्लैंप की गरमी जाँचिए, पलटना-छूना दस्ताने से; और अपनी थकान भी पढ़िए (पाठ-14): आर-पार क्रम में इधर-उधर झुकते बदन की मुद्रा सधी रहे (पाठ-13)। पपड़ी-उँगली-परीक्षा हमेशा ठंडी पट्टी पर — तपी लाइन पर फिरी उँगली दस्ताने समेत सिखाती है, पर महँगा सबक़।

तेज़ दोहराव

टुकड़े बालिश्त-भर, क्रम आर-पार, हर टुकड़े पर साँस · जोड़ाई: पीछे चढ़ो — पुराना सिरा पिघलाओ, तब आगे · टैक-पार: धीमे, घोलते हुए — रुको मत, कूदो मत · सिरे का कटोरा भरो — ख़ासकर आख़िरी · पपड़ी उतारकर उँगली-परीक्षा: जोड़ाई दिखनी नहीं चाहिए।

छोटी परीक्षा (Quiz)

(1) लंबी लाइन टुकड़ों में क्यों — दो कारण? (2) जोड़ाई की सही रीत क़दम-दर-क़दम लिखिए। (3) टैक पर रुकने और कूदने — दोनों के रोग क्या हैं? (4) सिरे का कटोरा ख़तरनाक क्यों और भरते कैसे हैं? (5) "जोड़ाई वह सिलाई है जो दिखनी नहीं चाहिए" — उँगली-परीक्षा से इसका रिश्ता समझाइए।

पाठ का सार (Chapter Summary)

पूरी लाइन की भराई टुकड़ों में बनती है पर लड़ी दिखनी चाहिए — यही पके हाथ की पहचान है। क्रम: बालिश्त-भर टुकड़े, आर-पार, हर टुकड़े पर धातु और अपनी — दोनों की साँस। जोड़ाई: नया आर्क पिछले सिरे से पीछे चढ़कर, पहले पुराने को पिघलाओ, तब आगे — गीले पर चढ़ा रंग धारी नहीं छोड़ता। टैक धीमी चाल में घोलते हुए पार; और हर टुकड़े के आख़िर में सिरे का कटोरा पल-भर ठहरकर भरो — वही दरार का घर है। पपड़ी उतारकर उँगली-परीक्षा: जोड़ाइयाँ जितनी कम पकड़ में आएँ, लिखावट उतनी पकी।

आगे क्या सीखें

लाइन भरनी आ गई — अब उस नक़्शे की बारी जो बताता है कि यही लाइन चार अलग-अलग दिशाओं में लगती है, और अब तक आप सबसे मेहरबान दिशा में खेल रहे थे। अगला दरवाज़ा — पाठ-95: समतल स्थिति (फ्लैट) — सबसे आसान दिशा।

वीडियो (Video)

इस पाठ का जाँचा-परखा वीडियो जल्द यहीं जुड़ेगा। तब तक दो जीवित रास्ते —

🎬 YouTube पर इस पाठ के वीडियो खोजें 🏛️ BharatSkills सरकारी वीडियो-मंच

(दोनों नई खिड़की में; वीडियो बिना भी पाठ पूरा — पढ़ाई कहीं नहीं रुकती।)