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कोर्स › वेल्डिंग (Welding) कोर्स › हिस्सा-undefined: SMAW (छड़-वेल्डिंग) — पहला टाँका से महारत तक

पाठ-89: लैप जोड़ — चढ़ा हुआ जोड़

पढ़ाई का समय: 11-13 मिनट · पाठ 89 / 630 · पढ़ाई पूरी तरह मुफ़्त

📖 कोर्स-परिचय

📚 सब पाठ — किसी भी पाठ पर सीधे जाओ
पाठ-1 पाठ-2 पाठ-3 पाठ-4 पाठ-5 पाठ-6 पाठ-7 पाठ-8 पाठ-9 पाठ-10 पाठ-11 पाठ-12 पाठ-13 पाठ-14 पाठ-15 पाठ-16 पाठ-17 पाठ-18 पाठ-19 पाठ-20 पाठ-21 पाठ-22 पाठ-23 पाठ-24 पाठ-25 पाठ-26 पाठ-27 पाठ-28 पाठ-29 पाठ-30 पाठ-31 पाठ-32 पाठ-33 पाठ-34 पाठ-35 पाठ-36 पाठ-37 पाठ-38 पाठ-39 पाठ-40 पाठ-41 पाठ-42 पाठ-43 पाठ-44 पाठ-45 पाठ-46 पाठ-47 पाठ-48 पाठ-49 पाठ-50 पाठ-51 पाठ-52 पाठ-53 पाठ-54 पाठ-55 पाठ-56 पाठ-57 पाठ-58 पाठ-59 पाठ-60 पाठ-61 पाठ-62 पाठ-63 पाठ-64 पाठ-65 पाठ-66 पाठ-67 पाठ-68 पाठ-69 पाठ-70 पाठ-71 पाठ-72 पाठ-73 पाठ-74 पाठ-75 पाठ-76 पाठ-77 पाठ-78 पाठ-79 पाठ-80 पाठ-81 पाठ-82 पाठ-83 पाठ-84 पाठ-85 पाठ-86 पाठ-87 पाठ-88 पाठ-89 (यही) पाठ-90 पाठ-91 पाठ-92 पाठ-93 पाठ-94 पाठ-95 पाठ-96 पाठ-97 पाठ-98 पाठ-99 पाठ-100 पाठ-101 पाठ-102 पाठ-103 पाठ-104 पाठ-105 पाठ-106 पाठ-107 पाठ-108 पाठ-109 पाठ-110 पाठ-111 पाठ-112 पाठ-113 पाठ-114 पाठ-115 पाठ-116 पाठ-117 पाठ-118 पाठ-119 पाठ-120 पाठ-121 पाठ-122 पाठ-123 पाठ-124 पाठ-125 पाठ-126 पाठ-127 पाठ-128 पाठ-129 पाठ-130 पाठ-131 पाठ-132 पाठ-133 पाठ-134 पाठ-135 पाठ-136 पाठ-137 पाठ-138 पाठ-139 पाठ-140 पाठ-141 पाठ-142 पाठ-143 पाठ-144 पाठ-145 पाठ-146 पाठ-147 पाठ-148 पाठ-149 पाठ-150 पाठ-151 पाठ-152 पाठ-153 पाठ-154 पाठ-155 पाठ-156 पाठ-157 पाठ-158 पाठ-159 पाठ-160 पाठ-161 पाठ-162 पाठ-163 पाठ-164 पाठ-165 पाठ-166 पाठ-167 पाठ-168 पाठ-169 पाठ-170 पाठ-171 पाठ-172 पाठ-173 पाठ-174 पाठ-175 पाठ-176 पाठ-177 पाठ-178 पाठ-179 पाठ-180 पाठ-181 पाठ-182 पाठ-183 पाठ-184 पाठ-185 पाठ-186 पाठ-187 पाठ-188 पाठ-189 पाठ-190 पाठ-191 पाठ-192 पाठ-193 पाठ-194 पाठ-195 पाठ-196 पाठ-197 पाठ-198 पाठ-199 पाठ-200 पाठ-201 पाठ-202 पाठ-203 पाठ-204 पाठ-205 पाठ-206 पाठ-207 पाठ-208 पाठ-209 पाठ-210 पाठ-211 पाठ-212 पाठ-213 पाठ-214 पाठ-215 पाठ-216 पाठ-217 पाठ-218 पाठ-219 पाठ-220 पाठ-221 पाठ-222 पाठ-223 पाठ-224 पाठ-225 पाठ-226 पाठ-227 पाठ-228 पाठ-229 पाठ-230 पाठ-231 पाठ-232 पाठ-233 पाठ-234 पाठ-235 पाठ-236 पाठ-237 पाठ-238 पाठ-239 पाठ-240 पाठ-241 पाठ-242 पाठ-243 पाठ-244 पाठ-245 पाठ-246 पाठ-247 पाठ-248 पाठ-249 पाठ-250 पाठ-251 पाठ-252 पाठ-253 पाठ-254 पाठ-255 पाठ-256 पाठ-257 पाठ-258 पाठ-259 पाठ-260 पाठ-261 पाठ-262 पाठ-263 पाठ-264 पाठ-265 पाठ-266 पाठ-267 पाठ-268 पाठ-269 पाठ-270 पाठ-271 पाठ-272 पाठ-273 पाठ-274 पाठ-275 पाठ-276 पाठ-277 पाठ-278 पाठ-279 पाठ-280 पाठ-281 पाठ-282 पाठ-283 पाठ-284 पाठ-285 पाठ-286 पाठ-287 पाठ-288 पाठ-289 पाठ-290 पाठ-291 पाठ-292 पाठ-293 पाठ-294 पाठ-295 पाठ-296 पाठ-297 पाठ-298 पाठ-299 पाठ-300 पाठ-301 पाठ-302 पाठ-303 पाठ-304 पाठ-305 पाठ-306 पाठ-307 पाठ-308 पाठ-309 पाठ-310 पाठ-311 पाठ-312 पाठ-313 पाठ-314 पाठ-315 पाठ-316 पाठ-317 पाठ-318 पाठ-319 पाठ-320 पाठ-321 पाठ-322 पाठ-323 पाठ-324 पाठ-325 पाठ-326 पाठ-327 पाठ-328 पाठ-329 पाठ-330 पाठ-331 पाठ-332 पाठ-333 पाठ-334 पाठ-335 पाठ-336 पाठ-337 पाठ-338 पाठ-339 पाठ-340 पाठ-341 पाठ-342 पाठ-343 पाठ-344 पाठ-345 पाठ-346 पाठ-347 पाठ-348 पाठ-349 पाठ-350 पाठ-351 पाठ-352 पाठ-353 पाठ-354 पाठ-355 पाठ-356 पाठ-357 पाठ-358 पाठ-359 पाठ-360 पाठ-361 पाठ-362 पाठ-363 पाठ-364 पाठ-365 पाठ-366 पाठ-367 पाठ-368 पाठ-369 पाठ-370 पाठ-371 पाठ-372 पाठ-373 पाठ-374 पाठ-375 पाठ-376 पाठ-377 पाठ-378 पाठ-379 पाठ-380 पाठ-381 पाठ-382 पाठ-383 पाठ-384 पाठ-385 पाठ-386 पाठ-387 पाठ-388 पाठ-389 पाठ-390 पाठ-391 पाठ-392 पाठ-393 पाठ-394 पाठ-395 पाठ-396 पाठ-397 पाठ-398 पाठ-399 पाठ-400 पाठ-401 पाठ-402 पाठ-403 पाठ-404 पाठ-405 पाठ-406 पाठ-407 पाठ-408 पाठ-409 पाठ-410 पाठ-411 पाठ-412 पाठ-413 पाठ-414 पाठ-415 पाठ-416 पाठ-417 पाठ-418 पाठ-419 पाठ-420 पाठ-421 पाठ-422 पाठ-423 पाठ-424 पाठ-425 पाठ-426 पाठ-427 पाठ-428 पाठ-429 पाठ-430 पाठ-431 पाठ-432 पाठ-433 पाठ-434 पाठ-435 पाठ-436 पाठ-437 पाठ-438 पाठ-439 पाठ-440 पाठ-441 पाठ-442 पाठ-443 पाठ-444 पाठ-445 पाठ-446 पाठ-447 पाठ-448 पाठ-449 पाठ-450 पाठ-451 पाठ-452 पाठ-453 पाठ-454 पाठ-455 पाठ-456 पाठ-457 पाठ-458 पाठ-459 पाठ-460 पाठ-461 पाठ-462 पाठ-463 पाठ-464 पाठ-465 पाठ-466 पाठ-467 पाठ-468 पाठ-469 पाठ-470 पाठ-471 पाठ-472 पाठ-473 पाठ-474 पाठ-475 पाठ-476 पाठ-477 पाठ-478 पाठ-479 पाठ-480 पाठ-481 पाठ-482 पाठ-483 पाठ-484 पाठ-485 पाठ-486 पाठ-487 पाठ-488 पाठ-489 पाठ-490 पाठ-491 पाठ-492 पाठ-493 पाठ-494 पाठ-495 पाठ-496 पाठ-497 पाठ-498 पाठ-499 पाठ-500 पाठ-501 पाठ-502 पाठ-503 पाठ-504 पाठ-505 पाठ-506 पाठ-507 पाठ-508 पाठ-509 पाठ-510 पाठ-511 पाठ-512 पाठ-513 पाठ-514 पाठ-515 पाठ-516 पाठ-517 पाठ-518 पाठ-519 पाठ-520 पाठ-521 पाठ-522 पाठ-523 पाठ-524 पाठ-525 पाठ-526 पाठ-527 पाठ-528 पाठ-529 पाठ-530 पाठ-531 पाठ-532 पाठ-533 पाठ-534 पाठ-535 पाठ-536 पाठ-537 पाठ-538 पाठ-539 पाठ-540 पाठ-541 पाठ-542 पाठ-543 पाठ-544 पाठ-545 पाठ-546 पाठ-547 पाठ-548 पाठ-549 पाठ-550 पाठ-551 पाठ-552 पाठ-553 पाठ-554 पाठ-555 पाठ-556 पाठ-557 पाठ-558 पाठ-559 पाठ-560 पाठ-561 पाठ-562 पाठ-563 पाठ-564 पाठ-565 पाठ-566 पाठ-567 पाठ-568 पाठ-569 पाठ-570 पाठ-571 पाठ-572 पाठ-573 पाठ-574 पाठ-575 पाठ-576 पाठ-577 पाठ-578 पाठ-579 पाठ-580 पाठ-581 पाठ-582 पाठ-583 पाठ-584 पाठ-585 पाठ-586 पाठ-587 पाठ-588 पाठ-589 पाठ-590 पाठ-591 पाठ-592 पाठ-593 पाठ-594 पाठ-595 पाठ-596 पाठ-597 पाठ-598 पाठ-599 पाठ-600 पाठ-601 पाठ-602 पाठ-603 पाठ-604 पाठ-605 पाठ-606 पाठ-607 पाठ-608 पाठ-609 पाठ-610 पाठ-611 पाठ-612 पाठ-613 पाठ-614 पाठ-615 पाठ-616 पाठ-617 पाठ-618 पाठ-619 पाठ-620 पाठ-621 पाठ-622 पाठ-623 पाठ-624 पाठ-625 पाठ-626 पाठ-627 पाठ-628 पाठ-629 पाठ-630

पाठ परिचय

बट जोड़ की खरी-कड़ी रीत के बाद आज जोड़-परिवार का सबसे मिलनसार सदस्य — लैप जोड़ (Lap Joint): एक टुकड़ा दूसरे पर चढ़ा हुआ, जैसे छप्पर पर खपरैल, जैसे एक के ऊपर दूसरा ताश का पत्ता। जहाँ बट नाप-झिरी की अदालत माँगता है, वहाँ लैप कहता है — "चढ़ा दो और सी दो।" इसीलिए पतली चादरों की दुनिया में यही घर-जमाई है: पाठ-65 में पुराने लोहे पर जो पट्टी-सहारा (Patch) सीखा था, वह असल में यही जोड़ था — आज उसका पूरा शास्त्र खुलेगा। पर मिलनसार का मतलब लापरवाह नहीं: लैप की अपनी नाप है (चढ़ाई कितनी?), अपनी सिलाई-जगह है (टाँका ठीक कहाँ?), और एक छिपी कमज़ोरी है जो बरसों बाद ज़ंग बनकर बोलती है। चारों बातें आज गाँठ बँधेंगी।

चढ़ाई एक दूसरे पर चढ़ा — खपरैल की रीत
पीला टाँका ऊपर वाले किनारे की रेखा पर — यही लैप की सिलाई-जगह है।

सीखने का उद्देश्य

इस पाठ के बाद आप: (1) लैप जोड़ की पहचान और उसके घर जान लेंगे, (2) उँगली-भर चढ़ाई का नाप-नियम सीख लेंगे, (3) किनारे की रेखा पर सिलाई और कोण का बँटवारा समझ लेंगे, और (4) बीच की नमी-जेब वाली छिपी कमज़ोरी का इलाज — दोनों किनारों की सिलाई — जान लेंगे।

मुख्य बात — चढ़ाई, सिलाई और छिपी जेब

(1) कहाँ मिलता है। चादर-मरम्मत की पट्टी (पाठ-65 का सहारा), ठेले-टंकी के पल्ले, डिब्बे का बदन, और हर वह जगह जहाँ दो पतली सतहें जुड़नी हों — पतले माल पर बट की झिरी-नाप साधना कठिन है (किनारे गलते हैं — पाठ-71), जबकि लैप में नीचे वाला टुकड़ा ख़ुद सहारा-पटरा बन जाता है: जोड़ भी, पटरा भी — एक तीर से दो निशाने।

(2) चढ़ाई की नाप। ऊपर वाला टुकड़ा नीचे वाले पर कम-से-कम अपनी चौड़ी उँगली जितना चढ़ा हो। नाम-मात्र की चढ़ाई नाम-मात्र की पकड़ देती है — किनारे-किनारे टिका जोड़ पहले झटके में होंठ खोल देता है। और चढ़ाई बेहिसाब बड़ी भी नहीं — माल का घाटा, वज़न का बोझ (पाठ-74 का हिसाब)।

(3) सिलाई की जगह और कोण। असली टाँका ऊपर वाले टुकड़े के किनारे की रेखा पर चलता है — वहाँ छड़ का बग़ल-कोण (पाठ-85) आधा-आधा बँटे: आधी गरमी ऊपर वाले किनारे को, आधी नीचे की सतह को — तभी दोनों गलकर एक होते हैं। कोण ऊपर की ओर ज़्यादा झुका तो पतला किनारा गलकर पीछे भागेगा; नीचे की ओर ज़्यादा तो टाँका नीचे की सतह पर लुढ़का रहेगा, किनारा भूखा।

(4) छिपी कमज़ोरी — बीच की जेब। लैप की बनावट में दो सतहों के बीच एक पतली दरार बचती है। एक ही किनारा सिला हो तो दूसरी ओर से इस जेब में नमी घुसती है — और भीतर बैठकर वही करती है जो नमी हमेशा करती है (पाठ-54): जोड़ के पेट में ज़ंग की खेती। इलाज सीधा — ज़िम्मेदार या खुले-बरसाती काम में दोनों किनारे सिलिए (ऊपर वाले का किनारा + नीचे झाँकता नीचे वाले का किनारा): जेब के दोनों मुँह बंद, नमी बाहर। भीतरी-सूखे हल्के काम में एक-किनारा चल जाता है — पर फ़ैसला सोचकर, आदत से नहीं।

(5) क्रम वही पुराना। सफ़ाई (चढ़ाई वाली पट्टी के दोनों बदन — पाठ-63) → क्लैंप से दबाकर सटाना (चादरों के बीच हवा का पेट न रहे) → सिरों पर टैक → किनारे की रेखा पर टुकड़ों में सिलाई → ठंडा होने पर जाँच।

चित्र से समझिए

आर-पार नज़र दोनों किनारे सिले ✔ जेब के दोनों मुँह बंद — नमी बाहर एक किनारा खुला = नमी की जेब — भीतर ज़ंग नाप: चढ़ाई ≥ चौड़ी उँगली भर टाँका ऊपर वाले किनारे की रेखा पर — कोण आधा-आधा
ऊपर सही (दोनों मुँह बंद), बीच में छिपी जेब का रोग — फ़र्क़ एक सिलाई का।

आसान भाषा में समझिए

छप्पर की खपरैलें देखिए — हर खपरैल अगली पर चढ़ी होती है, और चढ़ाव हमेशा इतना कि बारिश की धार नीचे वाली के ऊपर से ही बह जाए; कंजूसी से चढ़ाई खपरैल पहली बरसात में घर के भीतर टपकती है। और सयाना छप्पर-मिस्त्री जोड़ों के मुँह हवा की उल्टी दिशा में रखता है — पानी को घुसने का दरवाज़ा ही नहीं देता। लैप की उँगली-भर चढ़ाई और दोनों-किनारा सिलाई ठीक वही छप्पर-विद्या है — चढ़ाव पूरा, दरवाज़े बंद।

असली उदाहरण — साल भर बाद फूला जोड़

ठेले के तले में पट्टी-सहारा लगा था — कारीगर ने ऊपर वाला किनारा मोतियों-सा सिला, नीचे झाँकते किनारे को "दिखता ही नहीं" कहकर छोड़ दिया। ठेला बरसात में भीगता रहा। साल भर बाद वही ठेला लौटा — पट्टी के बीच से फूला हुआ, जैसे भीतर कुछ साँस ले रहा हो। ग्राइंडर से खोला गया तो दोनों सतहों के बीच ज़ंग की मोटी परत पल रही थी — खुले किनारे से घुसी नमी ने बंद जेब में पूरा साल खेती की थी, और फूलती ज़ंग ने जोड़ को भीतर से धकेल दिया था। उस्ताद ने नई पट्टी लगवाई — इस बार दोनों किनारे सिले, और लड़के से कहा — "जो किनारा तुझे नहीं दिखता, नमी को दिखता है। लैप की जेब के दोनों मुँह बंद कर — वरना जोड़ के पेट में दुश्मन पालेगा।"

AI के साथ अभ्यास

ACS के AI साथी से कहिए: "लैप जोड़ का पूरा क्रम बुलवाओ — चढ़ाई-नाप से दोनों-किनारा फ़ैसले तक; फिर पूछो: बट की जगह लैप कब चुनूँ, और लैप की छिपी कमज़ोरी का इलाज क्या?" आख़िर में हालात-सवाल: "भीतरी सूखी अलमारी का हल्का पल्ला है — एक किनारा या दोनों?"

आज ही करने का काम (Step-by-Step गतिविधि)

(1) कतरन की दो पतली पट्टियाँ लीजिए — सफ़ाई, फिर उँगली-भर चढ़ाकर क्लैंप से दबाइए (बीच में हवा का पेट नहीं)। (2) सिरों पर टैक, फिर ऊपर वाले किनारे की रेखा पर टुकड़ों में सिलाई — कोण आधा-आधा, कान सुर पर (पाठ-87)। (3) पलटकर नीचे झाँकता किनारा भी सिलिए — दोनों-मुँह-बंद का पहला हाथ। (4) ठंडा होने पर घुटना-इम्तिहान (पाठ-88 की रीत, जानकार साथ) — और खुले जोड़ के भीतर की सतह पढ़िए: दोनों गले थे या ऊपर वाला ही? (5) कॉपी में लैप के तीन नियम लिखिए — चढ़ाई, सिलाई-जगह, दोनों मुँह — और अपने आस-पास तीन लैप-जोड़ (ठेला, डिब्बा, टंकी) ढूँढकर उनकी सिलाई गिनिए: एक-किनारा या दोनों?

आम गलतियाँ

(1) नाम-मात्र की चढ़ाई — किनारे-किनारे टिका जोड़। (2) टाँका चढ़ाई के बीचों-बीच ऊपर की सतह पर चला देना — सिलाई किनारे की रेखा पर होती है, पीठ पर नहीं। (3) कोण ऊपर के पतले किनारे की ओर झुकाना — किनारा गलकर पीछे भागता है (पाठ-92 में यह रोग चरम पर मिलेगा)। (4) खुले-बरसाती काम में एक-किनारा सिलाई — साल भर बाद फूला जोड़।

सावधानियाँ

चादरों को क्लैंप से दबाते समय उँगलियाँ जबड़े की सीध से बाहर (पाठ-24), और पतले माल की सिलाई में पाठ-71 का पूरा क़ायदा — हल्का करंट, चलती चाल, नीचे ज़रूरत हो तो अलग पटरा। दोनों-किनारा सिलाई में जोड़ पलटना पड़ता है — तपा जोड़ दस्ताने से, और पलटते समय क्लैंप की पकड़ दोबारा।

तेज़ दोहराव

लैप = चढ़ा हुआ, खपरैल-सा — पतली चादर का घर-जमाई · चढ़ाई ≥ चौड़ी उँगली · सिलाई ऊपर वाले किनारे की रेखा पर, कोण आधा-आधा · छिपी कमज़ोरी = बीच की नमी-जेब; इलाज = दोनों किनारे सिलो (खुले काम में अनिवार्य) · क्रम: सफ़ाई → दबाओ → टैक → सिलो → पलटो।

छोटी परीक्षा (Quiz)

(1) पतले माल पर बट की जगह लैप क्यों? (2) चढ़ाई की नाप और कम चढ़ाई का रोग बताइए। (3) सिलाई की सही जगह और कोण का बँटवारा लिखिए। (4) लैप की छिपी जेब क्या है और दोनों-किनारा सिलाई कब अनिवार्य? (5) फूले जोड़ वाली कहानी का एक-पंक्ति सबक़।

पाठ का सार (Chapter Summary)

लैप जोड़ — एक टुकड़ा दूसरे पर उँगली-भर चढ़ा — पतली चादरों का घर-जमाई है: नीचे वाला टुकड़ा ख़ुद सहारा बनता है और झिरी-नाप का झंझट नहीं। सिलाई ऊपर वाले किनारे की रेखा पर, छड़ का कोण आधा किनारे को, आधा नीचे की सतह को। इसकी छिपी कमज़ोरी बीच की जेब है — एक किनारा खुला रहे तो नमी घुसकर भीतर ज़ंग की खेती करती है; इसलिए खुले-ज़िम्मेदार काम में दोनों किनारे सिलना पक्का नियम। जो किनारा आपको नहीं दिखता, नमी को दिखता है — लैप की यही गाँठ है।

आगे क्या सीखें

चढ़ा हुआ जोड़ सध गया — अब परिवार के कमाऊ बेटे की बारी, जिस पर रैक-फ्रेम-ढाँचे की आधी दुनिया खड़ी है: एक लेटा, एक खड़ा। अगला दरवाज़ा — पाठ-90: टी-जोड़ — खड़ा मिलन।

वीडियो (Video)

इस पाठ का जाँचा-परखा वीडियो जल्द यहीं जुड़ेगा। तब तक दो जीवित रास्ते —

🎬 YouTube पर इस पाठ के वीडियो खोजें 🏛️ BharatSkills सरकारी वीडियो-मंच

(दोनों नई खिड़की में; वीडियो बिना भी पाठ पूरा — पढ़ाई कहीं नहीं रुकती।)