कोर्स › टू-व्हीलर सर्विसिंग, EV एवं उद्यमिता कोर्स › अध्याय-11: Transmission-Wheel-Brake — भाग-1
अध्याय-11 · पाठ-9: Chain में तेल डालना — कब-कैसे
🌱 सरल-सार
नियमित अंतराल पर तेल डालें।
सफ़ाई पहले, फिर तेल।
सही Chain-Lubricant इस्तेमाल करें।
ज़्यादा या कम, दोनों नुक़सानदेह हैं।
📚 इस अध्याय के सब पाठ
Chain में तेल डालना, पिछले पाठ में सीखी Chain-देखभाल का सबसे आम, सबसे नियमित रूप से किया जाने वाला व्यावहारिक काम है, जिसे सही तरीक़े व सही समय पर करना, Chain की लंबी उम्र के लिए बहुत ज़रूरी है, यह गहराई से समझना बहुत उपयोगी है
Chain में तेल डालने से पहले, उसे पहले अच्छी तरह साफ़ करना ज़रूरी है — गंदी Chain पर सीधे तेल डालने से, धूल व तेल मिलकर एक चिपचिपा, घिसाव बढ़ाने वाला मिश्रण बना देते हैं, जो फ़ायदे की जगह नुक़सान करता है, इसलिए हमेशा पहले सफ़ाई, फिर तेल — यह क्रम कभी न बदलें, यह अध्याय-9 में सीखे Air-Filter की सफ़ाई-सिद्धांत से भी मिलता-जुलता है। तेल डालने का सही समय, गाड़ी के इस्तेमाल पर निर्भर करता है — जो गाड़ी रोज़, धूल-भरे रास्तों पर चलती है, उसे ज़्यादा बार तेल की ज़रूरत होती है, जबकि सामान्य, कम इस्तेमाल वाली गाड़ी को कम बार, मैनुअल में बताए एक तय अंतराल पर तेल देना काफ़ी है, यह जानकारी, ग्राहक की ड्राइविंग-आदत के हिसाब से सही सलाह देने में मदद करती है।
सही Chain-Lubricant चुनना क्यों ज़रूरी है
सामान्य Engine-Oil, Chain के लिए सही नहीं होता — इसके लिए ख़ास, गाढ़ा Chain-Lubricant बनाया जाता है, जो Chain से आसानी से बहकर बर्बाद नहीं होता, व लंबे समय तक चिकनाई देता है, यह अध्याय-8 में सीखी सही तेल-प्रकार चुनने की समझ का ही एक और, बहुत व्यावहारिक उदाहरण है, ग़लत तेल इस्तेमाल करने से बेहतर है, बिल्कुल न डालना, पर सही तेल हमेशा सबसे अच्छा विकल्प है।
बहुत ज़्यादा तेल डालना भी एक आम ग़लती है
कुछ लोग सोचते हैं कि ज़्यादा तेल, ज़्यादा सुरक्षा देता है, जबकि सच यह है कि बहुत ज़्यादा तेल, बाहर बहकर, आस-पास धूल-मिट्टी को और ज़्यादा आकर्षित करता है, व Rim व Brake तक भी पहुँच सकता है, जो एक अलग, नई समस्या बन सकता है — सही, संतुलित मात्रा में तेल डालना ही सबसे सही तरीक़ा है।
तेल डालने के बाद कुछ देर इंतज़ार करना भी ज़रूरी है
तेल डालने के तुरंत बाद गाड़ी चलाने के बजाय, कुछ मिनट रुककर, तेल को Chain के हर जोड़ में अच्छी तरह बैठने देना बेहतर है — यह छोटी सावधानी, तेल के पूरे, सही तरीक़े से फैलने में मदद करती है, जो Chain की सुरक्षा को और मज़बूत बनाती है।
संक्षेप में
सफ़ाई पहले, फिर सही Lubricant, नियमित अंतराल पर, संतुलित मात्रा में — यह पूरा सिद्धांत, Chain को लंबे समय तक स्वस्थ, सुरक्षित बनाए रखता है।
अगला पाठ
अगला पाठ Chain-Sprocket की जाँच व बदलने पर होगा — यह समझना कि यह दाँतेदार पहिये कब घिसते हैं व कैसे बदले जाते हैं।
Chain-Lubricant के अलग-अलग प्रकार भी समझना उपयोगी है
बाज़ार में कई तरह के Chain-Lubricant मिलते हैं — कुछ सूखे मौसम के लिए, कुछ बरसात के लिए बेहतर होते हैं, यह जानकारी, ग्राहक के इलाक़े व मौसम के हिसाब से, सही उत्पाद सुझाने में बहुत मदद करती है, यह छोटी, पर बहुत व्यावहारिक विशेषज्ञता, ग्राहक के भरोसे को और गहरा करती है।
Chain-तेल की मात्रा नापने का व्यावहारिक तरीक़ा
सही मात्रा का अंदाज़ा लगाने के लिए, Chain के हर हिस्से पर एक हल्की, पतली परत काफ़ी है — बहुत ज़्यादा टपकता तेल, ज़रूरत से ज़्यादा है, यह छोटा, व्यावहारिक नियम, नए मैकेनिकों को सही, संतुलित मात्रा जल्दी सीखने में बहुत मदद करता है, बिना किसी जटिल गणना के।
कौन-सा तेल — चिपकने वाला ही क्यों
चेन का तेल आम इंजन-तेल से अलग स्वभाव का है। उसे घूमती कड़ियों पर चिपके रहना है। पतला तेल पहली रफ़्तार में ही छिटक जाता है। इसीलिए चेन के लिए ख़ास चिपकीला तेल बना है। छिड़कने वाला रूप पहले पतला होकर भीतर घुसता है। कुछ पलों में गाढ़ा होकर जम जाता है। यही उसका कमाल है — भीतर पहुँचे, फिर टिके। गियर-तेल भी देसी चलन में चेन पर चलता है। वह सस्ता रास्ता है, पर छिटकता ज़्यादा है। छिटका तेल पिछले पहिये और कपड़ों पर दाग़ बनता है। जो भी चुनो, थोड़ा और नियमित — यही सूत्र जीतता है। बाढ़-सा बहा तेल धूल की दावत है।
तेल कहाँ डालना है — निशाना भीतरी माला
तेल पूरी चेन पर बरसाना बेअक़्ली है। निशाना तय जगह पर चाहिए। तेल हमेशा चेन की भीतरी माला पर डालो। यानी वह रुख़ जो स्प्रॉकेट से मिलता है। घूमती चाल का झटका तेल को बाहर की ओर फेंकता है। भीतर डाला तेल इसी धक्के से जोड़ों में समाता है। बाहर डाला तेल सीधे हवा में उड़ जाता है। निचली पट्टी पर, स्प्रॉकेट के पास वाली जगह चुनो। पहिया हाथ से धीमे घुमाते चलो। हर कड़ी पर एक बूँद — इतना काफ़ी है। डालने के बाद पाँच मिनट ठहरो। फिर फालतू तेल कपड़े से पोंछ दो। पुँछी चेन धूल कम पकड़ती है।
बारिश और धुलाई के बाद का नियम
पानी चेन-तेल का सबसे बड़ा चोर है। बारिश की सवारी तेल की परत धो डालती है। गाड़ी की धुलाई भी वही काम करती है। दोनों के बाद चेन को दोबारा तेल चाहिए। पहले चेन को सूखने का समय दो। गीली कड़ियों पर तेल टिकता नहीं। छोटी सूखी सवारी पानी उड़ाने का आसान रास्ता है। फिर भीतरी माला पर तेल की बूँदें चढ़ाओ। बरसात के मौसम में मियाद आधी कर दो। सूखे दिनों की पाँच सौ किलोमीटर वाली आदत ढाई सौ पर ले आओ। जंग लगी चेन की मरम्मत महँगी है। बूँद-भर तेल की पाबंदी उससे सौ गुना सस्ती।
ज़्यादा तेल का उल्टा नुक़सान
तेल की कमी जितनी बुरी है, बाढ़ भी उतनी ही। टपकता तेल पिछले टायर तक पहुँच सकता है। तेल-लगा टायर मोड़ पर जान से खेलता है। ब्रेक-डिस्क पर पहुँचा छींटा ब्रेक फिसला देता है। चिपचिपी मोटी परत धूल-कंकड़ की चादर ओढ़ लेती है। वही चादर रगड़कर कड़ियाँ खाती है। इसलिए मात्रा पर होश रखो। हर कड़ी पर बूँद — बस इतना नाप है। डालने के बाद पोंछने वाला कपड़ा ज़रूर चले। स्प्रॉकेट के आस-पास की छींटें भी साफ़ करो। सधी मात्रा वाली चेन हल्की आवाज़ में गाती है। तेल में डूबी चेन कीचड़ में रोती है।
वीडियो (Video)
इस पाठ का जाँचा-परखा वीडियो जल्द यहीं जुड़ेगा। तब तक एक जीवित रास्ता —
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(नई खिड़की में; वीडियो बिना भी पाठ पूरा — पढ़ाई कहीं नहीं रुकती।)
